जेडीए अधिकारी जॉन नंबर 10 में अवैध निर्माण पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे
ढेर की ढाणी खो नागोरियान मैं शहीद नगर नाम से नई कॉलोनी बसई जा रही है बीएचयू माफियाओं के हौंसले बुलंद
जेडीए जोन-10 में कथित भूमाफियाओं के हौसले बुलंद! काश्तकार की जमीन पर बसा दी DHER.KI.DHANI‘शहीद नगर’ कॉलोनी,बसाई जा रही है पट्टे बांटने का भी आरोप
जयपुर। राजधानी जयपुर में जमीनों पर अवैध कब्जे और कथित भू-माफियाओं की गतिविधियों को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जेडीए जोन नंबर-10 के अंतर्गत बसई ढेर की ढाणी नागोरियान जयपुर पास ‘शहीद नगर’ के नाम से नई कॉलोनी बसाए जाने का आरोप लगाया गया है। जमीन के काश्तकार का आरोप है कि उसकी जमीन पर बिना अनुमति और बिना सहमति के कॉलोनी बसा दी गई तथा लोगों को पट्टे भी वितरित कर दिए गए।
काश्तकार के अनुसार, जमीन पर उसका अधिकार है और उसने अपनी जमीन पर कोटि/स्टील लगाकर उसे सुरक्षित कर रखा था। इसके बावजूद कथित भूमाफियाओं ने उसकी जानकारी और सहमति के बिना जमीन पर कॉलोनी विकसित कर दी। काश्तकार ने इस पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
आखिर किसकी शह पर बसाई जा रही है कॉलोनी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन काश्तकार के स्वामित्व या वैध कब्जे में है, तो उसकी सहमति के बिना कॉलोनी कैसे विकसित की गई? कॉलोनी बसाने के लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई या नहीं? यदि पट्टे वितरित किए गए हैं, तो वे किन दस्तावेजों और किस आधार पर जारी किए गए?
जेडीए प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस मामले में जेडीए जोन नंबर-10 के अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या संबंधित अधिकारियों को इस कथित कॉलोनी के बारे में जानकारी है? यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
काश्तकार ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, जमीन के दस्तावेजों और वितरित किए गए पट्टों की जांच हो तथा यदि कोई अवैध गतिविधि प्रमाणित होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि जेडीए प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से �
जयपुर। राजधानी जयपुर में जमीनों पर अवैध कब्जे और कथित भू-माफियाओं की गतिविधियों को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जेडीए जोन नंबर-10 के अंतर्गत बसई ढेर की ढाणी नागोरियान जयपुर पास ‘शहीद नगर’ के नाम से नई कॉलोनी बसाए जाने का आरोप लगाया गया है। जमीन के काश्तकार का आरोप है कि उसकी जमीन पर बिना अनुमति और बिना सहमति के कॉलोनी बसा दी गई तथा लोगों को पट्टे भी वितरित कर दिए गए।
काश्तकार के अनुसार, जमीन पर उसका अधिकार है और उसने अपनी जमीन पर कोटि/स्टील लगाकर उसे सुरक्षित कर रखा था। इसके बावजूद कथित भूमाफियाओं ने उसकी जानकारी और सहमति के बिना जमीन पर कॉलोनी विकसित कर दी। काश्तकार ने इस पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
आखिर किसकी शह पर बसाई जा रही है कॉलोनी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन काश्तकार के स्वामित्व या वैध कब्जे में है, तो उसकी सहमति के बिना कॉलोनी कैसे विकसित की गई? कॉलोनी बसाने के लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई या नहीं? यदि पट्टे वितरित किए गए हैं, तो वे किन दस्तावेजों और किस आधार पर जारी किए गए?
जेडीए प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस मामले में जेडीए जोन नंबर-10 के अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या संबंधित अधिकारियों को इस कथित कॉलोनी के बारे में जानकारी है? यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
काश्तकार ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, जमीन के दस्तावेजों और वितरित किए गए पट्टों की जांच हो तथा यदि कोई अवैध गतिविधि प्रमाणित होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि जेडीए प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से �