📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / User:R K Alaria
अपराध
जबलपुर हाईकोर्ट ने राहुल वर्मन हत्या में तीन आरोपियों को बरी किया, मुख्य आरोपी की सजा 10 साल कर दी
✍️ Amar Ujala · Jabalpur
🗓 27 सित. 2026, 01:00 PM
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राहुल वर्मन की हत्या में तीन आरोपियों को बरी किया और मुख्य आरोपी सत्यम बर्मन की आजीवन सजा को धारा 304 के तहत 10 साल कर दिया।
जबलपुर के ग्वारीघाट थाना क्षेत्र में राहुल वर्मन की हत्या के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आज महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने मुख्य आरोपी के साथ तीन अन्य व्यक्तियों को बरी कर दिया, क्योंकि उन पर आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
मुख्य आरोपी सत्यम बर्मन की सजा पर भी पुनर्विचार किया गया। पहले उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे धारा 304 के तहत दस साल की कठोर कारावास में बदल दिया गया। धारा 304 का अर्थ है ऐसी हत्या जो हत्या के बराबर नहीं मानी जाती।
यह निर्णय अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और कानूनी मानकों के पुनर्मूल्यांकन को दर्शाता है। आदेश में बरी करने और सजा घटाने के कारणों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।
कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि अपीलीय अदालतें अक्सर निचली अदालत के फैसलों की पुनः जाँच करती हैं, विशेषकर जटिल मामलों में। यह फैसला राहुल वर्मन हत्या से जुड़ी लंबी कानूनी लड़ाई को राज्य स्तर पर समाप्त करता प्रतीत होता है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद तीन बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी, जबकि सत्यम बर्मन को अब दस साल की सजा का सामना करना पड़ेगा, जिसमें भविष्य में अपील का अधिकार बरकरार रहेगा।
मुख्य आरोपी सत्यम बर्मन की सजा पर भी पुनर्विचार किया गया। पहले उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे धारा 304 के तहत दस साल की कठोर कारावास में बदल दिया गया। धारा 304 का अर्थ है ऐसी हत्या जो हत्या के बराबर नहीं मानी जाती।
यह निर्णय अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और कानूनी मानकों के पुनर्मूल्यांकन को दर्शाता है। आदेश में बरी करने और सजा घटाने के कारणों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।
कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि अपीलीय अदालतें अक्सर निचली अदालत के फैसलों की पुनः जाँच करती हैं, विशेषकर जटिल मामलों में। यह फैसला राहुल वर्मन हत्या से जुड़ी लंबी कानूनी लड़ाई को राज्य स्तर पर समाप्त करता प्रतीत होता है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद तीन बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी, जबकि सत्यम बर्मन को अब दस साल की सजा का सामना करना पड़ेगा, जिसमें भविष्य में अपील का अधिकार बरकरार रहेगा।