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इंदौर में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बदलाव, अब विलंबित मामलों के लिए न्यायालयीन आदेश अनिवार्य
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1969 में 2026 के संशोधन के तहत नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। इंदौर के कलेक्टर ने सभी रजिस्ट्रारों को निर्देश जारी कर विलंबित पंजीकरण के लिए संबंधित अधिकारियों के आदेश की अनिवार्यता का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
इंदौर, 07 अक्टूबर 2026: जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (आरबीडी) अधिनियम 1969 की धारा 13 में 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) अधिनियम 2026' (2026 का संख्या 12) के माध्यम से महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। संशोधन संबंधी प्रावधान 6 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे और इन नए नियमों को 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी किया गया है।
इस संदर्भ में कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन) श्री शिवम वर्मा ने जिला स्तर पर आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश में सभी रजिस्ट्रारों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि वे संशोधित अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें। विशेष रूप से, धारा 13(3) के तहत, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा।
संशोधित नियमों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो वर्ष बाद विलंब से रजिस्ट्रार को प्रस्तुत की जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही संभव होगा। यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू है, जिसका उद्देश्य विलंबित पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक कठोर और नियंत्रित बनाना है।
संशोधित प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने जिला सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे अपने अधीनस्थ न्यायालयों के माध्यम से संबंधित आदेशों को नियमानुसार प्रसारित करें, ताकि सभी संबंधित अधिकारी नए दिशा-निर्देशों से अवगत रह सकें।
इस संदर्भ में कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन) श्री शिवम वर्मा ने जिला स्तर पर आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश में सभी रजिस्ट्रारों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि वे संशोधित अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें। विशेष रूप से, धारा 13(3) के तहत, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा।
संशोधित नियमों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो वर्ष बाद विलंब से रजिस्ट्रार को प्रस्तुत की जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही संभव होगा। यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू है, जिसका उद्देश्य विलंबित पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक कठोर और नियंत्रित बनाना है।
संशोधित प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने जिला सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे अपने अधीनस्थ न्यायालयों के माध्यम से संबंधित आदेशों को नियमानुसार प्रसारित करें, ताकि सभी संबंधित अधिकारी नए दिशा-निर्देशों से अवगत रह सकें।