📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
धर्म
फटाक्यांच्या प्रदूषण को धार्मिक रंग देना उचित? दिया मिर्झा ने उठाया दिवाली विवाद
✍️ News18 Marathi
🗓 03 नव. 2026, 08:02 AM
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News18 Marathi के 'Bade Mudde' में दिया मिर्झा ने दिवाली पर फटाकों के प्रदूषण को धार्मिक रंग देने पर सवाल उठाए।
News18 Marathi ने अपने वर्तमान‑समाचार कार्यक्रम "Bade Mudde" में दिवाली के दौरान फटाकों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को लेकर एक चर्चा प्रस्तुत की। अभिनेत्री और पर्यावरण कार्यकर्ता दिया मिर्झा ने इस मंच पर यह सवाल उठाया कि क्या फटाकों के कारण होने वाले प्रदूषण को धार्मिक रंग देना उचित है।
मिर्झा ने बताया कि हर साल दिवाली के अवसर पर वायु और शोर प्रदूषण में तीव्र वृद्धि होती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तथ्यों को धार्मिक परम्पराओं के सामने नहीं रखा जाना चाहिए।
इस चर्चा में यह भी देखा गया कि सांस्कृतिक प्रथाओं को आधुनिक पर्यावरणीय जागरूकता के साथ कैसे समायोजित किया जा सकता है। कुछ दर्शकों ने कड़े नियमों की मांग की, जबकि अन्य ने दिवाली की परम्पराओं को बनाए रखने की वकालत की।
कार्यक्रम ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला, यह संकेत देते हुए कि धार्मिक परम्पराओं और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस आगे भी जारी रहेगी।
मिर्झा ने बताया कि हर साल दिवाली के अवसर पर वायु और शोर प्रदूषण में तीव्र वृद्धि होती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तथ्यों को धार्मिक परम्पराओं के सामने नहीं रखा जाना चाहिए।
इस चर्चा में यह भी देखा गया कि सांस्कृतिक प्रथाओं को आधुनिक पर्यावरणीय जागरूकता के साथ कैसे समायोजित किया जा सकता है। कुछ दर्शकों ने कड़े नियमों की मांग की, जबकि अन्य ने दिवाली की परम्पराओं को बनाए रखने की वकालत की।
कार्यक्रम ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला, यह संकेत देते हुए कि धार्मिक परम्पराओं और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस आगे भी जारी रहेगी।