📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sundar
कृषि
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने लॉन्च किया उत्सव पैकेज, कीमतों में बढ़ोतरी के बीच
✍️ Indian Rice Exporters Federation
🗓 16 अक्टू. 2026, 02:46 AM
👁 13
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने नई उत्सव पैकेज की घोषणा की, कीमतों में बढ़ोतरी और मिस्र को निर्यात के संकेत देते हुए।
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर — इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने देश में बढ़ती मौसमी मांग को पूरा करने के लिए एक विशेष उत्सव पैकेज लॉन्च किया। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस ब्रीफ़िंग में यह पैकेज प्रीमियम बासमती और गैर‑बासमती चावल को बड़े, उपहार‑तैयार पैक में प्रस्तुत करता है, जो दिवाली और अन्य त्यौहारों के लिए उपयुक्त है।
IREF के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में घरेलू चावल की कीमतें आपूर्ति में कमी और बढ़ते इनपुट खर्चों के कारण बढ़ी हैं। इस कारण उत्सव पैकेज की कीमत सामान्य पैकेजों से थोड़ी अधिक है, परन्तु बड़े पैमाने पर मात्रा और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से उपभोक्ताओं को मूल्य प्रदान किया गया है।
साथ ही, फेडरेशन ने पुष्टि की कि इस नए पैकेज का एक हिस्सा मिस्र को निर्यात के लिए निर्धारित किया गया है, जहाँ भारतीय चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले तिमाही में निर्यात मात्रा में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे भारतीय किसान और निर्यातक दोनों को लाभ होगा, भले ही घरेलू कीमतें ऊपर हों।
यह लॉन्च IREF की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य घरेलू उपभोग की जरूरतों को निर्यात अवसरों के साथ संतुलित करना और भारतीय चावल को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
IREF के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में घरेलू चावल की कीमतें आपूर्ति में कमी और बढ़ते इनपुट खर्चों के कारण बढ़ी हैं। इस कारण उत्सव पैकेज की कीमत सामान्य पैकेजों से थोड़ी अधिक है, परन्तु बड़े पैमाने पर मात्रा और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से उपभोक्ताओं को मूल्य प्रदान किया गया है।
साथ ही, फेडरेशन ने पुष्टि की कि इस नए पैकेज का एक हिस्सा मिस्र को निर्यात के लिए निर्धारित किया गया है, जहाँ भारतीय चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले तिमाही में निर्यात मात्रा में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे भारतीय किसान और निर्यातक दोनों को लाभ होगा, भले ही घरेलू कीमतें ऊपर हों।
यह लॉन्च IREF की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य घरेलू उपभोग की जरूरतों को निर्यात अवसरों के साथ संतुलित करना और भारतीय चावल को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाना है।