📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kannanwarrier
देश
डॉ. कन्नन: केरल के जंगलों के लिए आक्रामक विदेशी प्रजातियां सबसे बड़ा खतरा
✍️ The New Indian Express
🗓 28 जून 2026, 02:46 PM
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डॉ. कन्नन ने केरल के वन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आक्रामक विदेशी प्रजातियों को प्रमुख खतरा बताया है।
डॉ. कन्नन के अनुसार, केरल के जंगलों के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण चुनौती आक्रामक विदेशी प्रजातियों का प्रसार है। ये गैर-देशी जीव, जो जानबूझकर या गलती से लाए गए हैं, स्थानीय वनस्पतियों और जीवों को पछाड़ रहे हैं, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है।
इन आक्रामक प्रजातियों का प्रभाव केरल के वन क्षेत्रों की जैव विविधता और स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। इनके अनियंत्रित प्रसार से आवास क्षरण और मूल पौधों व जानवरों की आबादी का नुकसान हो सकता है।
डॉ. कन्नन का आकलन राज्य के अद्वितीय वन पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए इन आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
इन आक्रामक प्रजातियों का प्रभाव केरल के वन क्षेत्रों की जैव विविधता और स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। इनके अनियंत्रित प्रसार से आवास क्षरण और मूल पौधों व जानवरों की आबादी का नुकसान हो सकता है।
डॉ. कन्नन का आकलन राज्य के अद्वितीय वन पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए इन आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।