📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / AnonymousUnknown author
राजनीति
इंदौर की छिपी हुई जंग: होलकर रियासत में आज़ादी सेनानियों पर दमन
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 15 अग. 2026, 07:07 AM
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भारत की आज़ादी की राह में, इंदौर की होलकर रियासत में भी आंदोलन की चिंगारी तेज़ हो रही थी। युवा कार्यकर्ता और प्रजामंडल कार्यकर्ताओं पर दमन हुआ, जबकि वे आज़ादी की आवाज़ बुलंद कर रहे थे।
1940 के शुरुआती दशक में, इंदौर, जो होलकर रियासत का हिस्सा था, स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख केंद्र बन गया।
स्थानीय युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने बैठकें आयोजित कीं, पर्चे बाँटे और स्वराज्य की माँग में प्रदर्शन किये। उनके प्रयासों पर होलकर सरकार ने गिरफ्तारी, सेंसरशिप और बलपूर्वक विघटन के साथ कड़ी प्रतिक्रिया दी।
दमन के बावजूद, आंदोलन जारी रहा और आस-पास के जिलों को प्रेरित किया, जिससे पूरे भारत के आज़ादी के संघर्ष में नई ऊर्जा आई। इतिहासकार अब इंदौर के इस संघर्ष को राज्य के स्वतंत्रता योगदान का महत्वपूर्ण अध्याय मानते हैं।
इन बहादुर व्यक्तियों की विरासत हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर मनाई जाती है, जो देश की संप्रभुता के लिए किए गए बलिदानों की याद दिलाती है।
स्थानीय युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने बैठकें आयोजित कीं, पर्चे बाँटे और स्वराज्य की माँग में प्रदर्शन किये। उनके प्रयासों पर होलकर सरकार ने गिरफ्तारी, सेंसरशिप और बलपूर्वक विघटन के साथ कड़ी प्रतिक्रिया दी।
दमन के बावजूद, आंदोलन जारी रहा और आस-पास के जिलों को प्रेरित किया, जिससे पूरे भारत के आज़ादी के संघर्ष में नई ऊर्जा आई। इतिहासकार अब इंदौर के इस संघर्ष को राज्य के स्वतंत्रता योगदान का महत्वपूर्ण अध्याय मानते हैं।
इन बहादुर व्यक्तियों की विरासत हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर मनाई जाती है, जो देश की संप्रभुता के लिए किए गए बलिदानों की याद दिलाती है।