📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mennonite Church USA Archives
टेक्नोलॉजी
इंदौर में दो-दिवसीय सेमीकंडक्टर शिखर सम्मेलन, 6,200 करोड़ निवेश प्रस्ताव पर चर्चा
✍️ Bhaskar English
🗓 23 अक्टू. 2026, 06:47 AM
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इंदौर में दो‑दिवसीय सेमीकंडक्टर शिखर सम्मेलन शुरू हुआ, जिसमें 6,200 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
इंदौर, मध्य प्रदेश में आज दो‑दिवसीय सेमीकंडक्टर शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ, जिसमें सरकारी अधिकारी, उद्योग के प्रमुख और संभावित निवेशक शामिल हैं। यह कार्यक्रम राज्य सरकार और राष्ट्रीय उद्योग संगठनों के सहयोग से घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
सम्मेलन का मुख्य बिंदु 6,200 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर केंद्रित है, जिसका लक्ष्य एक सेमीकंडक्टर फेब्रिकेशन प्लांट, सहायक इकाइयाँ और अनुसंधान सुविधाएँ स्थापित करना है। प्रतिभागी वित्तीय ढांचा, नीति प्रोत्साहन और आवश्यक बुनियादी ढाँचा पर चर्चा करेंगे ताकि निजी पूँजी को आकर्षित किया जा सके।
आयोजकों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन भारत के ‘मेक इन इंडिया’ लक्ष्य को उच्च‑तकनीकी निर्माण क्षेत्र में तेज़ी देगा और इंदौर को चिप डिज़ाइन व उत्पादन का केंद्र बनायेगा। चर्चा में कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण और निर्यात संभावनाओं को भी शामिल किया जाएगा।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो यह हजारों रोजगार सृजित कर सकता है और आयातित चिप्स पर निर्भरता को कम कर सकता है, जो हालिया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी नीतियों में प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य के रूप में उभरा है।
सम्मेलन का मुख्य बिंदु 6,200 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर केंद्रित है, जिसका लक्ष्य एक सेमीकंडक्टर फेब्रिकेशन प्लांट, सहायक इकाइयाँ और अनुसंधान सुविधाएँ स्थापित करना है। प्रतिभागी वित्तीय ढांचा, नीति प्रोत्साहन और आवश्यक बुनियादी ढाँचा पर चर्चा करेंगे ताकि निजी पूँजी को आकर्षित किया जा सके।
आयोजकों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन भारत के ‘मेक इन इंडिया’ लक्ष्य को उच्च‑तकनीकी निर्माण क्षेत्र में तेज़ी देगा और इंदौर को चिप डिज़ाइन व उत्पादन का केंद्र बनायेगा। चर्चा में कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण और निर्यात संभावनाओं को भी शामिल किया जाएगा।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो यह हजारों रोजगार सृजित कर सकता है और आयातित चिप्स पर निर्भरता को कम कर सकता है, जो हालिया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी नीतियों में प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य के रूप में उभरा है।