📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / This file comes from the website of the President
विदेश
एससीओ के भविष्य में भारत की भूमिका निर्णायक
✍️ India's World
🗓 29 अग. 2026, 07:49 PM
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विश्लेषकों का मानना है कि भारत की भागीदारी यह तय कर सकती है कि शंघाई सहयोग संगठन व्यापक बहुपक्षीय मंच बन पाएगा या नहीं।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 2001 में चीन, रूस और कई मध्य एशियाई देशों द्वारा की गई थी, जो सुरक्षा के अलावा आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को भी अपना लक्ष्य बनाता है। हालिया बैठकों में इस बात पर चर्चा हुई है कि क्या SCO मौजूदा संस्थानों जैसे संयुक्त राष्ट्र और ASEAN के पूरक के रूप में एक नया बहुपक्षीय मॉडल बन सकता है।
भारत, जो वर्तमान में SCO का पर्यवेक्षक (observer) है, उच्च‑स्तरीय यात्राओं और संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से अपनी भागीदारी को गहरा कर रहा है। नीति विशेषज्ञ भारत की पूर्ण सदस्यता को इस ब्लॉक की क्षमता का परीक्षण मानते हैं कि वह अधिक विविध अर्थव्यवस्थाओं को सम्मिलित कर सके और फिर भी सर्वसम्मति‑आधारित निर्णय‑प्रक्रिया बनाए रखे।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की भागीदारी SCO में आर्थिक शक्ति और रणनीतिक संतुलन लाएगी, पर साथ ही सदस्य देशों के विभिन्न भू‑राजनीतिक हितों के कारण चुनौतियाँ भी उत्पन्न होंगी। भारत के प्रस्ताव का परिणाम इस बात को निर्धारित करेगा कि बहुपक्षीयता के बदलते परिदृश्य में SCO कितना प्रासंगिक रहेगा।
यदि भारत पूर्ण सदस्यता प्राप्त करता है, तो SCO अधिक समावेशी क्षेत्रीय संवाद मंच बन सकता है, जो एशिया‑यूरोप में व्यापक बहुपक्षीय सहयोग की ओर संकेत करेगा।
भारत, जो वर्तमान में SCO का पर्यवेक्षक (observer) है, उच्च‑स्तरीय यात्राओं और संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से अपनी भागीदारी को गहरा कर रहा है। नीति विशेषज्ञ भारत की पूर्ण सदस्यता को इस ब्लॉक की क्षमता का परीक्षण मानते हैं कि वह अधिक विविध अर्थव्यवस्थाओं को सम्मिलित कर सके और फिर भी सर्वसम्मति‑आधारित निर्णय‑प्रक्रिया बनाए रखे।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की भागीदारी SCO में आर्थिक शक्ति और रणनीतिक संतुलन लाएगी, पर साथ ही सदस्य देशों के विभिन्न भू‑राजनीतिक हितों के कारण चुनौतियाँ भी उत्पन्न होंगी। भारत के प्रस्ताव का परिणाम इस बात को निर्धारित करेगा कि बहुपक्षीयता के बदलते परिदृश्य में SCO कितना प्रासंगिक रहेगा।
यदि भारत पूर्ण सदस्यता प्राप्त करता है, तो SCO अधिक समावेशी क्षेत्रीय संवाद मंच बन सकता है, जो एशिया‑यूरोप में व्यापक बहुपक्षीय सहयोग की ओर संकेत करेगा।