📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Planning Commission
स्वास्थ्य
भारत की जन्मदर 1.9 तक गिर गई, ईएसी‑पीएम ने नीति पुनरावलोकन की माँग की
✍️ Vibes Of India
🗓 19 सित. 2026, 09:02 AM
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नवीनतम जनसांख्यिकीय आँकड़े दर्शाते हैं कि भारत की कुल जन्मदर 1.9 तक गिर गई है, जिससे ईएसी‑पीएम ने संबंधित नीतियों की पुनः समीक्षा का सुझाव दिया है।
नवीनतम जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत की कुल जन्मदर (TFR) अब 1.9 बच्चों प्रति महिला तक गिर गई है, जो 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है। यह निरंतर गिरावट कई वर्षों से नीति निर्माताओं की निगरानी में रही है।
इसी के मद्देनज़र, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC‑PM) ने एक पत्र जारी किया है जिसमें परिवार नियोजन, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण उपायों की पुनः समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया गया है। परिषद का मानना है कि लगातार कम जन्मदर श्रम शक्ति, आर्थिक वृद्धि और आयु‑निर्भरता अनुपात पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
परामर्श दस्तावेज़ में प्रजनन को प्रोत्साहित करने वाले प्रोत्साहनों को मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा और महिलाओं के रोजगार अवसरों के सुधार के साथ संतुलित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही, क्षेत्रीय विविधताओं को बेहतर समझने के लिए डेटा संग्रह को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया है।
सरकार ने अभी तक कोई विशिष्ट नीति परिवर्तन नहीं बताया है, परन्तु यह पत्र स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय में आगामी चर्चाओं को दिशा देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नीति में बदलाव को कम जन्मदर के सामाजिक‑आर्थिक कारणों और संभावित जनसांख्यिकीय लाभ दोनों को ध्यान में रखना होगा।
1.9 की कुल जन्मदर पर गिरावट यह संकेत देती है कि भारत को युवा से वृद्ध जनसंख्या की ओर संक्रमण के दौरान एक समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।
इसी के मद्देनज़र, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC‑PM) ने एक पत्र जारी किया है जिसमें परिवार नियोजन, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण उपायों की पुनः समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया गया है। परिषद का मानना है कि लगातार कम जन्मदर श्रम शक्ति, आर्थिक वृद्धि और आयु‑निर्भरता अनुपात पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
परामर्श दस्तावेज़ में प्रजनन को प्रोत्साहित करने वाले प्रोत्साहनों को मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा और महिलाओं के रोजगार अवसरों के सुधार के साथ संतुलित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही, क्षेत्रीय विविधताओं को बेहतर समझने के लिए डेटा संग्रह को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया है।
सरकार ने अभी तक कोई विशिष्ट नीति परिवर्तन नहीं बताया है, परन्तु यह पत्र स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय में आगामी चर्चाओं को दिशा देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नीति में बदलाव को कम जन्मदर के सामाजिक‑आर्थिक कारणों और संभावित जनसांख्यिकीय लाभ दोनों को ध्यान में रखना होगा।
1.9 की कुल जन्मदर पर गिरावट यह संकेत देती है कि भारत को युवा से वृद्ध जनसंख्या की ओर संक्रमण के दौरान एक समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।