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बिज़नेस
एएमएफ निर्यात से भारत के डेयरी सेक्टर को वैश्विक बाज़ार में जगह मिल सकती है
✍️ BusinessLine
🗓 13 सित. 2026, 06:37 PM
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भारत एल्फा-2 मिल्क प्रोटीन (एएमएफ) के माध्यम से अपने डेयरी निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक बाज़ार में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के अवसरों का पता लगा रहा है।
भारत के डेयरी उद्योग ने अल्फा-2 मिल्क प्रोटीन (एएमएफ) को अंतर्राष्ट्रीय विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में देखना शुरू कर दिया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि एएमएफ पर जोर देकर भारतीय डेयरी उत्पादों को प्रीमियम वैश्विक बाज़ार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।
यह पहल भारत को दुनिया के प्रमुख दूध उत्पादकों में से एक के रूप में अपनी स्थिति का उपयोग करके प्रतिस्पर्धियों से अपने निर्यात को अलग करने के लिए की जा रही है। एएमएफ से जुड़े स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डालकर, भारतीय डेयरी कंपनियां उन विदेशी उपभोक्ताओं को आकर्षित करना चाहती हैं जो विशेष डेयरी उत्पादों के लिए प्रीमियम मूल्य चुकाने को तैयार हैं।
यह रणनीति में बदलाव भारत के डेयरी निर्यात पोर्टफोलियो को घी और मक्खन जैसे पारंपरिक वस्तुओं से आगे बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि एएमएफ खंड का लाभ उठाना नई आय स्रोत प्रदान कर सकता है और भारतीय डेयरी की वैश्विक ब्रांड वैल्यू को बढ़ा सकता है।
हालांकि, संभावनाओं को मान्यता मिली है, लेकिन सेक्टर को अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने और विदेशी बाज़ारों में ब्रांड विश्वास बनाने की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी, एएमएफ पर ध्यान केंद्रित करना भारतीय डेयरी को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक वादा करने वाला कदम माना जा रहा है।
यह पहल भारत को दुनिया के प्रमुख दूध उत्पादकों में से एक के रूप में अपनी स्थिति का उपयोग करके प्रतिस्पर्धियों से अपने निर्यात को अलग करने के लिए की जा रही है। एएमएफ से जुड़े स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डालकर, भारतीय डेयरी कंपनियां उन विदेशी उपभोक्ताओं को आकर्षित करना चाहती हैं जो विशेष डेयरी उत्पादों के लिए प्रीमियम मूल्य चुकाने को तैयार हैं।
यह रणनीति में बदलाव भारत के डेयरी निर्यात पोर्टफोलियो को घी और मक्खन जैसे पारंपरिक वस्तुओं से आगे बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि एएमएफ खंड का लाभ उठाना नई आय स्रोत प्रदान कर सकता है और भारतीय डेयरी की वैश्विक ब्रांड वैल्यू को बढ़ा सकता है।
हालांकि, संभावनाओं को मान्यता मिली है, लेकिन सेक्टर को अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने और विदेशी बाज़ारों में ब्रांड विश्वास बनाने की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी, एएमएफ पर ध्यान केंद्रित करना भारतीय डेयरी को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक वादा करने वाला कदम माना जा रहा है।