📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pete Woodhead
टेक्नोलॉजी
भारत के आपराधिक कानूनों में फेशियल रिकग्निशन के नियम नहीं, तीन संशोधन प्रस्तावित
✍️ ThePrint
🗓 09 अक्टू. 2026, 10:53 AM
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द प्रिंट के एक हालिया विश्लेषण में बताया गया है कि भारत के मौजूदा आपराधिक कानूनों में फेशियल रिकग्निशन के उपयोग को नियंत्रित करने का कोई प्रावधान नहीं है। रिपोर्ट इस अंतर को दूर करने के लिए तीन विशिष्ट विधायी संशोधनों का सुझाव देती है।
द प्रिंट की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय दंड संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता जैसे प्रमुख आपराधिक कानून वर्तमान में फेशियल रिकग्निशन प्रौद्योगिकी के नियमन के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं रखते हैं।
इस नियामक अंतर के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों और निजी संस्थाओं द्वारा इस तकनीक को स्पष्ट कानूनी बाध्यताओं के बिना प्रयोग किया जा सकता है, जो गोपनीयता के उल्लंघन और दुरुपयोग की आशंका पैदा करता है।
विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा आपराधिक ढांचे में तीन विशिष्ट संशोधनों को शामिल करने से फेशियल रिकग्निशन को परिभाषित कानूनी निगरानी और जवाबदेही के दायरे में लाया जा सकता है।
रिपोर्ट विधायकों से आग्रह करती है कि वे इन परिवर्तनों पर त्वरित विचार करें, ताकि तकनीक के लाभों को उपयोग में लाते हुए नागरिक अधिकारों की रक्षा की जा सके जब तक कि正式 नियम नहीं बन जाते।
इस नियामक अंतर के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों और निजी संस्थाओं द्वारा इस तकनीक को स्पष्ट कानूनी बाध्यताओं के बिना प्रयोग किया जा सकता है, जो गोपनीयता के उल्लंघन और दुरुपयोग की आशंका पैदा करता है।
विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा आपराधिक ढांचे में तीन विशिष्ट संशोधनों को शामिल करने से फेशियल रिकग्निशन को परिभाषित कानूनी निगरानी और जवाबदेही के दायरे में लाया जा सकता है।
रिपोर्ट विधायकों से आग्रह करती है कि वे इन परिवर्तनों पर त्वरित विचार करें, ताकि तकनीक के लाभों को उपयोग में लाते हुए नागरिक अधिकारों की रक्षा की जा सके जब तक कि正式 नियम नहीं बन जाते।