📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
विदेश
भारत की ब्रिक्स में बढ़ती महत्त्वता से पड़ोसी देशों में चिंता
✍️ ThePrint
🗓 13 सित. 2026, 08:06 PM
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भारत की ब्रिक्स में बढ़ती भूमिका से पड़ोसी देशों में चिंता बढ़ी है, जो भविष्य की पहलों में बाहर रहने से डरते हैं।
नई दिल्ली ने ब्रिक्स समूह में एक प्रमुख भूमिका निभाते हुए अपनी आर्थिक शक्ति और रणनीतिक स्थिति का उपयोग करके एजेंडा को आकार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार सुगमता, डिजिटल सहयोग और जलवायु वित्त जैसे क्षेत्रों में भारत की नेतृत्व क्षमता उसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को बढ़ा रही है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार सहित पड़ोसी देशों ने इन बदलावों पर करीबी नज़र रखी है। इन देशों के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि विस्तारित ब्रिक्स ढांचा उनके आर्थिक हितों को बाहर रख सकता है, जिससे निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी के अवसर सीमित हो सकते हैं।
इस चिंता के चलते कई पड़ोसी देशों ने ब्रिक्स तंत्र में पर्यवेक्षक दर्जा या गहरी भागीदारी की मांग की है। जबकि भारत व्यापक क्षेत्रीय भागीदारी का स्वागत करता है, वह सदस्यता मानदंडों को आर्थिक और राजनीतिक मानकों पर आधारित रखने पर ज़ोर देता है।
यह परिवर्तन दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में एक नई दिशा दर्शाता है, जहाँ ब्रिक्स में भारत की बढ़ती महत्त्वता क्षेत्रीय सहयोग के पैटर्न को पुनः परिभाषित कर सकती है और भविष्य के व्यापार मार्गों को प्रभावित कर सकती है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार सहित पड़ोसी देशों ने इन बदलावों पर करीबी नज़र रखी है। इन देशों के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि विस्तारित ब्रिक्स ढांचा उनके आर्थिक हितों को बाहर रख सकता है, जिससे निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी के अवसर सीमित हो सकते हैं।
इस चिंता के चलते कई पड़ोसी देशों ने ब्रिक्स तंत्र में पर्यवेक्षक दर्जा या गहरी भागीदारी की मांग की है। जबकि भारत व्यापक क्षेत्रीय भागीदारी का स्वागत करता है, वह सदस्यता मानदंडों को आर्थिक और राजनीतिक मानकों पर आधारित रखने पर ज़ोर देता है।
यह परिवर्तन दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में एक नई दिशा दर्शाता है, जहाँ ब्रिक्स में भारत की बढ़ती महत्त्वता क्षेत्रीय सहयोग के पैटर्न को पुनः परिभाषित कर सकती है और भविष्य के व्यापार मार्गों को प्रभावित कर सकती है।