📷 चित्र स्रोत: Pragativadi (via NewsData)
स्वास्थ्य
जवाहरलाल नेहरू सेंटर की टीम ने स्मार्टफ़ोन से अल्ज़ाइमर का रक्त‑जाँच विकसित किया
✍️ Pragativadi
🗓 26 अग. 2026, 02:03 PM
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जवाहरलाल नेहरू सेंटर की वैज्ञानिक टीम ने एक ड्रॉप रक्त से अल्ज़ाइमर के बायोमार्कर पहचानने के लिए स्मार्टफ़ोन‑आधारित परीक्षण विकसित किया, जिससे महँगी स्कैनिंग की आवश्यकता घट सकती है।
जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के वैज्ञानिकों ने अल्ज़ाइमर रोग के निदान को सरल बनाने वाला एक नया तरीका पेश किया है। एक विशेष चिप पर एक बूंद रक्त लगाकर, वह रोग‑संबंधी प्रोटीन संकेतों को पकड़ता है और स्मार्टफ़ोन ऐप के माध्यम से डेटा का विश्लेषण करता है। इस प्रक्रिया में महँगी PET या MRI स्कैनिंग की जरूरत नहीं रहती।
टीम ने बताया कि यह परीक्षण एमी्लॉइड‑बीटा और टाउ प्रोटीन जैसे प्रमुख बायोमार्कर को प्रयोगशाला‑स्तर की संवेदनशीलता के साथ पहचान सकता है, और परिणाम कुछ ही मिनटों में फ़ोन पर दिखा देता है, जिससे शुरुआती चरण के रोगियों की पहचान आसान हो जाती है।
वर्तमान में प्रोटोटाइप का क्लिनिकल परीक्षण चल रहा है, लेकिन वैज्ञानिक इसे दूरदराज या कम संसाधन वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग के लिए उपयोगी मानते हैं। आगे अस्पतालों और बायोटेक कंपनियों के साथ सहयोग करके तकनीक को परिपक्व करने और नियामक मंजूरी प्राप्त करने की योजना है।
सफलता मिलने पर यह स्मार्टफ़ोन‑आधारित परीक्षण भारत में लाखों संभावित डिमेंशिया रोगियों के लिए कम लागत वाला, त्वरित और बिंदु‑पर‑सेवा समाधान बन सकता है।
टीम ने बताया कि यह परीक्षण एमी्लॉइड‑बीटा और टाउ प्रोटीन जैसे प्रमुख बायोमार्कर को प्रयोगशाला‑स्तर की संवेदनशीलता के साथ पहचान सकता है, और परिणाम कुछ ही मिनटों में फ़ोन पर दिखा देता है, जिससे शुरुआती चरण के रोगियों की पहचान आसान हो जाती है।
वर्तमान में प्रोटोटाइप का क्लिनिकल परीक्षण चल रहा है, लेकिन वैज्ञानिक इसे दूरदराज या कम संसाधन वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग के लिए उपयोगी मानते हैं। आगे अस्पतालों और बायोटेक कंपनियों के साथ सहयोग करके तकनीक को परिपक्व करने और नियामक मंजूरी प्राप्त करने की योजना है।
सफलता मिलने पर यह स्मार्टफ़ोन‑आधारित परीक्षण भारत में लाखों संभावित डिमेंशिया रोगियों के लिए कम लागत वाला, त्वरित और बिंदु‑पर‑सेवा समाधान बन सकता है।