📷 चित्र स्रोत: Hindustan Times (via NewsData)
टेक्नोलॉजी
भारतीय पायलट संघ ने एआई‑171 दुर्घटना जांच रिपोर्ट पर स्वतंत्र समीक्षा में भागीदारी की मांग की
✍️ Hindustan Times
🗓 27 सित. 2026, 11:18 AM
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फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने एआई‑171 दुर्घटना जांच रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा में पायलटों की भागीदारी की मांग की, यह कहते हुए कि अग्रिम पंक्ति के अनुभव से विमानन सुरक्षा बेहतर हो सकती है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने 10 सितंबर 2023 को हुई एआई‑171 दुर्घटना की स्वतंत्र समीक्षा में पायलटों को शामिल करने का औपचारिक अनुरोध किया है। इस दुर्घटना में एक घरेलू उड़ान ने टेकऑफ़ के तुरंत बाद नियंत्रण खो दिया था, और इस पर Directorate General of Civil Aviation (DGCA) द्वारा विस्तृत जांच चल रही है।
FIP के बयान में कहा गया कि पायलटों के पास अनूठी परिचालन अंतर्दृष्टि है जो संभावित प्रणालीगत समस्याओं की पहचान में मदद कर सकती है। संगठन का तर्क है कि पायलटों को समीक्षा प्रक्रिया में शामिल करने से निष्कर्षों की विश्वसनीयता और व्यापकता बढ़ेगी।
उदाहरण के तौर पर, FIP ने अन्य देशों में पायलट इनपुट के कारण हुई सुरक्षा सुधारों का हवाला दिया, यह बताते हुए कि अग्रिम पंक्ति का फीडबैक ऐसे प्रक्रियागत अंतराल को उजागर कर सकता है जो केवल जांचकर्ताओं को स्पष्ट नहीं होते। उन्होंने DGCA से सहयोगी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया, ताकि सिफारिशें व्यावहारिक उड़ान अनुभव पर आधारित हों।
DGCA ने अभी तक इस अनुरोध पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। FIP नियोजित है कि वह विमानन प्राधिकरणों और उद्योग हितधारकों के साथ बैठक करे ताकि पायलट भागीदारी को समीक्षा समयरेखा में कैसे समाहित किया जाए, इस पर चर्चा हो सके। इस संवाद का परिणाम भारत के तेजी से बढ़ते नागरिक विमानन क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
FIP के बयान में कहा गया कि पायलटों के पास अनूठी परिचालन अंतर्दृष्टि है जो संभावित प्रणालीगत समस्याओं की पहचान में मदद कर सकती है। संगठन का तर्क है कि पायलटों को समीक्षा प्रक्रिया में शामिल करने से निष्कर्षों की विश्वसनीयता और व्यापकता बढ़ेगी।
उदाहरण के तौर पर, FIP ने अन्य देशों में पायलट इनपुट के कारण हुई सुरक्षा सुधारों का हवाला दिया, यह बताते हुए कि अग्रिम पंक्ति का फीडबैक ऐसे प्रक्रियागत अंतराल को उजागर कर सकता है जो केवल जांचकर्ताओं को स्पष्ट नहीं होते। उन्होंने DGCA से सहयोगी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया, ताकि सिफारिशें व्यावहारिक उड़ान अनुभव पर आधारित हों।
DGCA ने अभी तक इस अनुरोध पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। FIP नियोजित है कि वह विमानन प्राधिकरणों और उद्योग हितधारकों के साथ बैठक करे ताकि पायलट भागीदारी को समीक्षा समयरेखा में कैसे समाहित किया जाए, इस पर चर्चा हो सके। इस संवाद का परिणाम भारत के तेजी से बढ़ते नागरिक विमानन क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।