📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of External Affairs
बिज़नेस
दुबई में भारतीय कंपनियों की संख्या जून अंत तक 85,841 पहुँची, दुबई चेम्बर्स अध्यक्ष ने कहा
✍️ thehawk.in
🗓 28 अग. 2026, 09:38 PM
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दुबई चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने बताया कि जून के अंत तक दुबई में कार्यरत भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 तक बढ़ गई।
दुबई के प्रमुख व्यापार संघ ने बताया कि भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों की संख्या जून के अंत तक 85,841 तक पहुंच गई, जो कम समय में तेज़ी से बढ़ी है। यह आंकड़ा दुबई चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष ने अमीरात में विदेशी निवेश की स्थिति पर हालिया ब्रीफ़िंग में बताया।
हालांकि पिछले महीनों के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इस तीव्र वृद्धि से व्यापार, निर्माण और सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय व्यवसायों की बढ़ती उपस्थिति स्पष्ट होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौतों, फ्री ज़ोन में आसान कंपनी स्थापना और यूएई बाजार में भारतीय विशेषज्ञता की बढ़ती मांग ने इस प्रवृत्ति को प्रोत्साहित किया है।
अध्यक्ष ने कहा कि यह उछाल भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक संबंधों के गहरे होने का संकेत है और उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिक भारतीय उद्यमी दुबई के गतिशील माहौल में अवसर तलाशते रहेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति द्विपक्षीय व्यापार के आयतन को बढ़ा सकती है और प्रवासी तथा स्थानीय दोनों श्रमिकों के लिए अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है, जिससे दुबई को खाड़ी में भारतीय व्यापार का प्रमुख केंद्र बनने में मदद मिलेगी।
हालांकि पिछले महीनों के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इस तीव्र वृद्धि से व्यापार, निर्माण और सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय व्यवसायों की बढ़ती उपस्थिति स्पष्ट होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौतों, फ्री ज़ोन में आसान कंपनी स्थापना और यूएई बाजार में भारतीय विशेषज्ञता की बढ़ती मांग ने इस प्रवृत्ति को प्रोत्साहित किया है।
अध्यक्ष ने कहा कि यह उछाल भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक संबंधों के गहरे होने का संकेत है और उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिक भारतीय उद्यमी दुबई के गतिशील माहौल में अवसर तलाशते रहेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति द्विपक्षीय व्यापार के आयतन को बढ़ा सकती है और प्रवासी तथा स्थानीय दोनों श्रमिकों के लिए अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है, जिससे दुबई को खाड़ी में भारतीय व्यापार का प्रमुख केंद्र बनने में मदद मिलेगी।