📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Lev.Borisovitch
विदेश
भारत ने यूएन‑समर्थित विश्व मानचित्र में जम्मू‑कश्मीर, लद्दाख को आधिकारिक मानचित्र के अनुसार दिखाने की मांग की
✍️ orissapost.com
🗓 06 सित. 2026, 04:18 PM
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भारत के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि विश्व स्तर पर प्रकाशित मानचित्र में जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार दिखाया जाना चाहिए।
नई दिल्ली – विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र को औपचारिक रूप से बताया कि यूएन‑समर्थित किसी भी प्रस्तावित विश्व मानचित्र में जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दर्शाया जाना चाहिए। यह मांग भारत की यह मान्यता को दोहराती है कि ये क्षेत्र राष्ट्रीय संपूर्ण का अभिन्न हिस्सा हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में उनका कोई भी परिवर्तन अस्वीकार्य है।
मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह अनुरोध भारत के संप्रभु अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है, और उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य के सभी वैश्विक मानचित्रण कार्यों में भारत का आधिकारिक मानचित्र शामिल किया जाएगा। समय‑सीमा का उल्लेख नहीं किया गया, पर यह बात आगामी कूटनीतिक मंचों में उठाई जाएगी।
यह बयान विश्व स्तर पर मानचित्रों के विभिन्न रूपों को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता के बीच आया है, जहाँ छोटे‑छोटे बदलाव भी कूटनीतिक तनाव पैदा कर सकते हैं। भारत ने पहले भी उन मानचित्रों का विरोध किया है जो विवादित क्षेत्रों को अलग दिखाते हैं, और इस कदम से यूएन‑प्रायोजित सामग्री में ऐसी असंगतियों को रोकने का प्रयास किया गया है।
यूएन ने अभी तक इस भारतीय अनुरोध पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि यूएन कोई एकीकृत विश्व मानचित्र नहीं बनाता, उसके विभिन्न एजेंसियां मानकीकृत मानचित्र डेटा का उपयोग करती हैं, इसलिए भारत का यह अपील वैश्विक मानचित्रण पर प्रभाव डालने का एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है।
विदेश मंत्रालय ने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भारत के आधिकारिक मानचित्र को सम्मानित करने का आग्रह किया।
मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह अनुरोध भारत के संप्रभु अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है, और उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य के सभी वैश्विक मानचित्रण कार्यों में भारत का आधिकारिक मानचित्र शामिल किया जाएगा। समय‑सीमा का उल्लेख नहीं किया गया, पर यह बात आगामी कूटनीतिक मंचों में उठाई जाएगी।
यह बयान विश्व स्तर पर मानचित्रों के विभिन्न रूपों को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता के बीच आया है, जहाँ छोटे‑छोटे बदलाव भी कूटनीतिक तनाव पैदा कर सकते हैं। भारत ने पहले भी उन मानचित्रों का विरोध किया है जो विवादित क्षेत्रों को अलग दिखाते हैं, और इस कदम से यूएन‑प्रायोजित सामग्री में ऐसी असंगतियों को रोकने का प्रयास किया गया है।
यूएन ने अभी तक इस भारतीय अनुरोध पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि यूएन कोई एकीकृत विश्व मानचित्र नहीं बनाता, उसके विभिन्न एजेंसियां मानकीकृत मानचित्र डेटा का उपयोग करती हैं, इसलिए भारत का यह अपील वैश्विक मानचित्रण पर प्रभाव डालने का एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है।
विदेश मंत्रालय ने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भारत के आधिकारिक मानचित्र को सम्मानित करने का आग्रह किया।