📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Epolk
ऑटोमोबाइल
20230 तक सभी नई पैसेंजर कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग अनिवार्य
✍️ Livemint
🗓 25 अक्टू. 2026, 06:18 AM
👁 17
एक मसौदा नियम के अनुसार 2030 से भारत में बेची जाने वाली सभी नई पैसेंजर कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) सिस्टम अनिवार्य किया जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक नियम पर विचार कर रहा है, जिसके तहत 2030 से सभी नई पैसेंजर कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) तकनीक अनिवार्य हो जाएगी। यह कदम देश में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और उच्च ट्रैफ़िक मृत्यु दर को कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
AEB सिस्टम रडार, लिडार और कैमरा सेंसरों के संयोजन से वाहन के आसपास की स्थिति को निरन्तर मॉनिटर करता है। जब यह प्रणाली किसी संभावित टक्कर को पहचानती है—चाहे वह अन्य वाहन, पैदल यात्री या कोई बाधा हो—तो यह चालक को चेतावनी देती है और यदि चालक समय पर प्रतिक्रिया नहीं करता, तो स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर टक्कर को कम या रोक देती है।
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि यह अनिवार्यता भारतीय ऑटोमोटिव बाजार में उन्नत ड्राइवर‑असिस्ट फीचर्स के अपनाने को तेज़ करेगी, जिससे निर्माताओं को AEB को वैकल्पिक के बजाय मानक घटक के रूप में शामिल करना पड़ेगा। नियमन को अगले कुछ वर्षों में अंतिम रूप देने की संभावना है, जिससे निर्माताओं को अनुपालन के लिए मॉडल पुनः डिज़ाइन करने का समय मिलेगा।
यदि यह लागू हो जाता है, तो 2030 की समय सीमा भारत को कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ जोड़ देगी, जिन्होंने पहले ही समान सुरक्षा आवश्यकताएँ लागू कर ली हैं, और इससे राष्ट्रीय सड़कों पर हजारों जीवन बचाने की संभावना है।
AEB सिस्टम रडार, लिडार और कैमरा सेंसरों के संयोजन से वाहन के आसपास की स्थिति को निरन्तर मॉनिटर करता है। जब यह प्रणाली किसी संभावित टक्कर को पहचानती है—चाहे वह अन्य वाहन, पैदल यात्री या कोई बाधा हो—तो यह चालक को चेतावनी देती है और यदि चालक समय पर प्रतिक्रिया नहीं करता, तो स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर टक्कर को कम या रोक देती है।
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि यह अनिवार्यता भारतीय ऑटोमोटिव बाजार में उन्नत ड्राइवर‑असिस्ट फीचर्स के अपनाने को तेज़ करेगी, जिससे निर्माताओं को AEB को वैकल्पिक के बजाय मानक घटक के रूप में शामिल करना पड़ेगा। नियमन को अगले कुछ वर्षों में अंतिम रूप देने की संभावना है, जिससे निर्माताओं को अनुपालन के लिए मॉडल पुनः डिज़ाइन करने का समय मिलेगा।
यदि यह लागू हो जाता है, तो 2030 की समय सीमा भारत को कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ जोड़ देगी, जिन्होंने पहले ही समान सुरक्षा आवश्यकताएँ लागू कर ली हैं, और इससे राष्ट्रीय सड़कों पर हजारों जीवन बचाने की संभावना है।