📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Nikhil B
बिज़नेस
भारत फँसा रूसी तेल और नई अमेरिकी प्रतिबंध कानून के बीच
✍️ Asianet Newsable
🗓 22 सित. 2026, 04:36 AM
👁 14
वाशिंगटन के नए प्रतिबंधों के कारण भारत को रूसी तेल पर निर्भरता के बीच कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
भारत के पेट्रोलियम क्षेत्र ने पिछले वर्ष रूसी कच्चे तेल की आयात मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे घरेलू ईंधन की कीमतें स्थिर रहने में मदद मिली है।
वाशिंगटन ने नई प्रतिबंध विधि लागू की है, जो रूसी तेल की खरीद, परिवहन या वित्तपोषण करने वाले विदेशी संस्थानों पर दंड बढ़ाती है। राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित इस कानून का उद्देश्य मॉस्को की आय पर दबाव बनाना है।
इन दोहरी चुनौतियों के बीच भारतीय रिफाइनर कठिन स्थिति में हैं। उन्हें अपने रिफाइनरी सेट‑अप के अनुरूप रूसी तेल की आवश्यकता है, जबकि अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर द्वितीयक दंड का जोखिम है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वैकल्पिक आपूर्ति विकल्पों की समीक्षा और आपूर्ति व्यवधान को कम करने के लिए सहयोगियों से संवाद जारी रखने की बात कही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत को महंगे विकल्प अपनाने पड़ते हैं तो रूबल पर दबाव और आयात लागत में बढ़ोतरी हो सकती है, परंतु विविधीकृत आयात पोर्टफोलियो और रणनीतिक भंडार कुछ हद तक इस जोखिम को कम करेंगे।
वाशिंगटन ने नई प्रतिबंध विधि लागू की है, जो रूसी तेल की खरीद, परिवहन या वित्तपोषण करने वाले विदेशी संस्थानों पर दंड बढ़ाती है। राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित इस कानून का उद्देश्य मॉस्को की आय पर दबाव बनाना है।
इन दोहरी चुनौतियों के बीच भारतीय रिफाइनर कठिन स्थिति में हैं। उन्हें अपने रिफाइनरी सेट‑अप के अनुरूप रूसी तेल की आवश्यकता है, जबकि अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर द्वितीयक दंड का जोखिम है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वैकल्पिक आपूर्ति विकल्पों की समीक्षा और आपूर्ति व्यवधान को कम करने के लिए सहयोगियों से संवाद जारी रखने की बात कही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत को महंगे विकल्प अपनाने पड़ते हैं तो रूबल पर दबाव और आयात लागत में बढ़ोतरी हो सकती है, परंतु विविधीकृत आयात पोर्टफोलियो और रणनीतिक भंडार कुछ हद तक इस जोखिम को कम करेंगे।