📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
विदेश
भारत चाहता है बीआरआईसीएस में तटस्थ नेतृत्व, चीन कहता है यह टिकाऊ नहीं
✍️ ThePrint
🗓 09 सित. 2026, 07:46 AM
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भारत ने बीआरआईसीएस को तटस्थ रूप से नेतृत्व करने की इच्छा जताई, पर चीन का मानना है कि यह रवैया टिकाऊ नहीं रहेगा।
नई दिल्ली ने कहा है कि वह बीआरआईसीएस समूह में नेतृत्व करना चाहती है, लेकिन किसी विशेष पक्ष के साथ संरेखित नहीं होना चाहती, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता पर ज़ोर दिया गया है। यह रुख भारत के आर्थिक व सुरक्षा हितों को संतुलित करने और एक ऐसे बहुपक्षीय मंच को समर्थन देने का प्रयास है जहाँ कोई भी भूराजनीतिक गठबंधन प्रमुख न हो।
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि इस दृष्टिकोण से बीआरआईसीएस के भीतर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, विशेषकर व्यापार, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में, बिना किसी प्रतिद्वंद्वी शक्ति के टकराव में फँसे। तटस्थ सुविधा प्रदाता बनकर नई दिल्ली वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक महत्ता को सुदृढ़ करना चाहती है।
चीन के प्रतिनिधियों ने इस नीति की स्थायित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि विविध रणनीतिक साझेदारों वाले समूह में तटस्थ नेतृत्व बनाना कठिन है। उनका मानना है कि स्पष्ट संरेखण के बिना भारत की भूमिका आंतरिक टकराव और बाहरी दबाव का सामना कर सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन वैचारिक अंतरालों से बीआरआईसीएस के भविष्य के समीकरणों पर असर पड़ सकता है, जहाँ सदस्य राष्ट्र स्वतंत्रता और सामूहिक एकता के बीच संतुलन खोजने की कोशिश करेंगे।
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि इस दृष्टिकोण से बीआरआईसीएस के भीतर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, विशेषकर व्यापार, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में, बिना किसी प्रतिद्वंद्वी शक्ति के टकराव में फँसे। तटस्थ सुविधा प्रदाता बनकर नई दिल्ली वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक महत्ता को सुदृढ़ करना चाहती है।
चीन के प्रतिनिधियों ने इस नीति की स्थायित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि विविध रणनीतिक साझेदारों वाले समूह में तटस्थ नेतृत्व बनाना कठिन है। उनका मानना है कि स्पष्ट संरेखण के बिना भारत की भूमिका आंतरिक टकराव और बाहरी दबाव का सामना कर सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन वैचारिक अंतरालों से बीआरआईसीएस के भविष्य के समीकरणों पर असर पड़ सकता है, जहाँ सदस्य राष्ट्र स्वतंत्रता और सामूहिक एकता के बीच संतुलन खोजने की कोशिश करेंगे।