📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bijay chaurasia
विदेश
भारत-नेपाल संयुक्त कार्यसमूह ने सीमा अपराध और अतिक्रमण पर चर्चा की
✍️ BusinessLine
🗓 23 अग. 2026, 06:37 AM
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भारत-नेपाल संयुक्त कार्यसमूह ने सीमा अपराध, बुनियादी ढाँचे के काम और सीमा पर अतिक्रमण को लेकर बैठक की।
भारत और नेपाल के गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने 1,770 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने के लिए द्विपक्षीय संयुक्त कार्यसमूह (JWG) की बैठक की। दोनों पक्षों ने सीमा पार अपराध, विशेषकर वस्तु तस्करी और अवैध प्रवास के हालिया मामलों का मूल्यांकन किया।
प्रतिनिधियों ने सीमा अपराध में हालिया वृद्धि को उजागर किया, जो दोनों देशों की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है। तस्करी और मानव तस्करी नेटवर्क को रोकने के लिए खुफिया जानकारी का आदान‑प्रदान बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त गश्त करने पर सहमति बनी।
बैठक में लंबित सीमा‑बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी और निगरानी को सुदृढ़ करना है। दोनों सरकारें सड़कों, चेक‑पोस्ट और बाड़ जैसी सुविधाओं के निर्माण को तेज करने तथा सीमा के कुछ गाँवों में उत्पन्न अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रतिबद्ध हुईं।
समापन में, JWG ने अपराध‑रोकथाम उपायों और बुनियादी ढाँचा विकास की प्रगति की निगरानी के लिए त्रैमासिक समीक्षा तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया, जिससे भारत‑नेपाल संबंधों की रणनीतिक महत्ता को और मजबूत किया जा सके।
प्रतिनिधियों ने सीमा अपराध में हालिया वृद्धि को उजागर किया, जो दोनों देशों की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है। तस्करी और मानव तस्करी नेटवर्क को रोकने के लिए खुफिया जानकारी का आदान‑प्रदान बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त गश्त करने पर सहमति बनी।
बैठक में लंबित सीमा‑बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी और निगरानी को सुदृढ़ करना है। दोनों सरकारें सड़कों, चेक‑पोस्ट और बाड़ जैसी सुविधाओं के निर्माण को तेज करने तथा सीमा के कुछ गाँवों में उत्पन्न अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रतिबद्ध हुईं।
समापन में, JWG ने अपराध‑रोकथाम उपायों और बुनियादी ढाँचा विकास की प्रगति की निगरानी के लिए त्रैमासिक समीक्षा तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया, जिससे भारत‑नेपाल संबंधों की रणनीतिक महत्ता को और मजबूत किया जा सके।