📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Reliance Industries
बिज़नेस
जम्मनागर मॉडल दोहराना जरूरी, एंटी‑बिजनेस‑एंटी‑अमेरिकन रुख पर दावेदार
✍️ ThePrint
🗓 26 अक्टू. 2026, 03:37 AM
👁 17
द थ प्रिंट के संपादकीय में कहा गया है कि एंटी‑बिजनेस नीतियों और त्वरित एंटी‑अमेरिकन रुख से भारत की राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँच रहा है और जम्मनागर जैसे औद्योगिक केंद्रों की आवश्यकता है।
द थ प्रिंट ने “इंडिया नीड्स मोर जामनगरस। एंटी‑बिजनेस, नी‑जर्ग एंटी‑अमेरिकनिज़्म हर्ट नेशनल इंटरेस्ट” शीर्षक से एक विचार लेख प्रकाशित किया। इस लेख में कहा गया है कि हाल के नीतिगत संकेत और सार्वजनिक विमर्श में निजी उद्यमों के प्रति बढ़ती शत्रुता आर्थिक गति को धीमा कर सकती है।
जम्मनागर, जहाँ विश्व के बड़े तेल रिफ़ाइनरी और पेट्रोकेमिकल संयंत्र स्थित हैं, को उदाहरण बनाते हुए लेख में कहा गया है कि ऐसे औद्योगिक मॉडल को देश भर में दोहराने से विनिर्माण, निर्यात और रोजगार में वृद्धि होगी। साथ ही, त्वरित एंटी‑अमेरिकन रुख, विशेषकर व्यापार तनाव या प्रौद्योगिकी प्रतिबंध के रूप में, भारत को आवश्यक साझेदारियों और निवेश से वंचित कर सकता है।
लेख में नीति निर्माताओं से व्यवसाय‑हितैषी रुख अपनाने, विदेशी सहयोग को प्रोत्साहित करने और रणनीतिक हितों की रक्षा के बीच संतुलन बनाने का आग्रह किया गया है, ताकि देश की विकास गति बनी रहे।
जम्मनागर, जहाँ विश्व के बड़े तेल रिफ़ाइनरी और पेट्रोकेमिकल संयंत्र स्थित हैं, को उदाहरण बनाते हुए लेख में कहा गया है कि ऐसे औद्योगिक मॉडल को देश भर में दोहराने से विनिर्माण, निर्यात और रोजगार में वृद्धि होगी। साथ ही, त्वरित एंटी‑अमेरिकन रुख, विशेषकर व्यापार तनाव या प्रौद्योगिकी प्रतिबंध के रूप में, भारत को आवश्यक साझेदारियों और निवेश से वंचित कर सकता है।
लेख में नीति निर्माताओं से व्यवसाय‑हितैषी रुख अपनाने, विदेशी सहयोग को प्रोत्साहित करने और रणनीतिक हितों की रक्षा के बीच संतुलन बनाने का आग्रह किया गया है, ताकि देश की विकास गति बनी रहे।