📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Agriculture and Farmers' Welfare
कृषि
भारत ने किसानों के लिए पहला मिट्टी कार्बन भुगतान योजना शुरू की
✍️ TRIPURA STAR NEWS
🗓 18 सित. 2026, 07:46 AM
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सरकार ने एक नई मिट्टी कार्बन भुगतान योजना शुरू की, जिससे किसानों को पुनर्योजी कृषि में मुख्य भूमिका मिली है।
नई दिल्ली – कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने भारत में पहली बार मिट्टी कार्बन भुगतान योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य सतत खेती को प्रोत्साहित करना और मिट्टी में कार्बन के संग्रह को बढ़ाना है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को कवर क्रॉपिंग, कम जुताई और जैविक खाद जैसे पुनर्योजी उपाय अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा।
यह पहल भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ तालमेल बिठाते हुए कृषि भूमि को कार्बन सिंक में बदलने और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं, जहाँ उच्च कार्बन संग्रह क्षमता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
हितधारकों का मानना है कि यह भुगतान छोटे किसानों के लिए स्थिर आय का स्रोत बन सकता है, जिससे जलवायु‑स्मार्ट खेती का व्यापक अपनाना संभव होगा। प्रारंभिक परिणामों के मूल्यांकन के बाद सरकार इस योजना का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की योजना बना रही है।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि वास्तविक और मापनीय कार्बन वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कठोर निगरानी व सत्यापन प्रणाली आवश्यक होगी। फिर भी, यह कदम नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जहाँ किसानों को शून्य‑उत्सर्जन लक्ष्य में मुख्य साझेदार माना गया है।
यह पहल भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ तालमेल बिठाते हुए कृषि भूमि को कार्बन सिंक में बदलने और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं, जहाँ उच्च कार्बन संग्रह क्षमता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
हितधारकों का मानना है कि यह भुगतान छोटे किसानों के लिए स्थिर आय का स्रोत बन सकता है, जिससे जलवायु‑स्मार्ट खेती का व्यापक अपनाना संभव होगा। प्रारंभिक परिणामों के मूल्यांकन के बाद सरकार इस योजना का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की योजना बना रही है।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि वास्तविक और मापनीय कार्बन वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कठोर निगरानी व सत्यापन प्रणाली आवश्यक होगी। फिर भी, यह कदम नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जहाँ किसानों को शून्य‑उत्सर्जन लक्ष्य में मुख्य साझेदार माना गया है।