📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Commonpersoon
अपराध
भारत में पशुओं के खिलाफ यौन हिंसा के बढ़ते मामलों पर चिंतन
✍️ The Animal Reader
🗓 14 अक्टू. 2026, 07:18 AM
👁 17
पशु अधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि भारत में पशुओं के खिलाफ यौन शोषण बढ़ रहा है और मौजूदा क़ानूनों की कड़ी कार्यवाही की आवश्यकता है।
पशु अधिकार संगठनों ने भारत में पशुओं के खिलाफ यौन शोषण के बढ़ते मामलों को लेकर चेतावनी जारी की है। यह समस्या अक्सर अनदेखी रहती है, लेकिन यह 1960 के पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के प्रवर्तन में खामियों को उजागर करती है, जो पशुओं के साथ यौन कृत्यों को दंडनीय बनाता है।
क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि क़ानून में दंड निर्धारित है, पर साक्ष्य की कमी और सामाजिक कलंक के कारण अभियोजन दर कम है। कार्यकर्ताओं ने विशेष जांच इकाइयों और अनिवार्य रिपोर्टिंग तंत्र की मांग की है ताकि अपराधियों को सजा मिल सके।
यह मुद्दा संसद में भी चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ सांसद पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मौजूदा कानूनों की समीक्षा और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। इस बीच, गैर‑सरकारी संगठनों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियानों का संचालन किया है, नागरिकों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने को कहा गया है।
यदि इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो विशेषज्ञों का मानना है कि पशुओं के खिलाफ यौन हिंसा का सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे कानून प्रवर्तन, पशु चिकित्सा सेवाओं और नागरिक समाज के बीच समन्वित प्रयास की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि क़ानून में दंड निर्धारित है, पर साक्ष्य की कमी और सामाजिक कलंक के कारण अभियोजन दर कम है। कार्यकर्ताओं ने विशेष जांच इकाइयों और अनिवार्य रिपोर्टिंग तंत्र की मांग की है ताकि अपराधियों को सजा मिल सके।
यह मुद्दा संसद में भी चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ सांसद पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मौजूदा कानूनों की समीक्षा और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। इस बीच, गैर‑सरकारी संगठनों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियानों का संचालन किया है, नागरिकों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने को कहा गया है।
यदि इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो विशेषज्ञों का मानना है कि पशुओं के खिलाफ यौन हिंसा का सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे कानून प्रवर्तन, पशु चिकित्सा सेवाओं और नागरिक समाज के बीच समन्वित प्रयास की आवश्यकता स्पष्ट होती है।