📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Parliamentary Affairs
राजनीति
भारत ने डिजिटल गिरफ्तारी और एआई डीपफेक को अलग अपराध बनाने के लिए नया बिल प्रस्तावित किया
✍️ India.Com
🗓 29 जुल. 2026, 03:41 PM
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एक मसौदा बिल भारत में डिजिटल गिरफ्तारी और एआई डीपफेक को अलग अपराध बनाने का लक्ष्य रखता है, जिससे साइबर‑कानून प्रवर्तन को सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
भारतीय संसद एक नए बिल को पेश करने के लिए तैयार है, जो डिजिटल गिरफ्तारी और एआई‑जनित डीपफेक को अलग अपराध के रूप में वर्गीकृत करेगा। यह प्रस्ताव तकनीक के दुरुपयोग से उत्पन्न मानहानि, धोखाधड़ी और राजनीतिक हेरफेर से निपटने के लिए बनाया गया है।
डिजिटल गिरफ्तारी का मतलब है बिना न्यायालय के आदेश के तकनीक का इस्तेमाल करके किसी को रोका या सीमित करना, जबकि एआई डीपफेक ऐसे सिंथेटिक मीडिया को कहते हैं जो ऑडियो या वीडियो को विश्वसनीय रूप से बदल सकते हैं। दोनों प्रथाएँ गोपनीयता, प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय रही हैं।
बिल को एक पार्लियामेंटरी समिति द्वारा जांचा जाएगा और फिर पूर्ण बहस के लिए भेजा जाएगा, जिसका लक्ष्य वर्तमान सत्र के भीतर इसे पारित करना है। विधायकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज समूहों ने स्पष्ट कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए समर्थन व्यक्त किया है।
यदि यह कानून लागू होता है, तो यह कड़ी सज़ा, जैसे जुर्माना और कैद, लागू करेगा और कानून प्रवर्तन को अपराधियों का पीछा करने में सक्षम बनाएगा। यह कदम भारतीय साइबर‑कानून के अनुपालन के प्रति टेक उद्योग को एक मजबूत संकेत देने की उम्मीद है।
डिजिटल गिरफ्तारी का मतलब है बिना न्यायालय के आदेश के तकनीक का इस्तेमाल करके किसी को रोका या सीमित करना, जबकि एआई डीपफेक ऐसे सिंथेटिक मीडिया को कहते हैं जो ऑडियो या वीडियो को विश्वसनीय रूप से बदल सकते हैं। दोनों प्रथाएँ गोपनीयता, प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय रही हैं।
बिल को एक पार्लियामेंटरी समिति द्वारा जांचा जाएगा और फिर पूर्ण बहस के लिए भेजा जाएगा, जिसका लक्ष्य वर्तमान सत्र के भीतर इसे पारित करना है। विधायकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज समूहों ने स्पष्ट कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए समर्थन व्यक्त किया है।
यदि यह कानून लागू होता है, तो यह कड़ी सज़ा, जैसे जुर्माना और कैद, लागू करेगा और कानून प्रवर्तन को अपराधियों का पीछा करने में सक्षम बनाएगा। यह कदम भारतीय साइबर‑कानून के अनुपालन के प्रति टेक उद्योग को एक मजबूत संकेत देने की उम्मीद है।