📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Samudra Bikash Hazarika
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रक्षा
बॉर्डर सुरक्षा के लिए डिजिटल फेंसिंग और एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 18 अक्टू. 2026, 10:31 AM
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भारत अपनी सीमाओं पर घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए कंक्रीट आधार, स्टील फेंसिंग और एंटी-ड्रोन तकनीक से लैस डिजिटल फेंसिंग का निर्माण कर रहा है।
भारत सरकार सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक उन्नत डिजिटल फेंसिंग सिस्टम का निर्माण कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य अवैध घुसपैठ और तस्करी को रोकना है। यह प्रणाली एक मजबूत भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक बाधा बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
निर्माण प्रक्रिया में जमीन पर पहले एक ठोस कंक्रीट का आधार तैयार किया जाता है, जिससे संरचना को स्थिरता मिलती है। इसके बाद, इस कंक्रीट आधार पर लगभग दस फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग खड़ी की जाती है, जो अवैध पारगमन के खिलाफ एक प्राथमिक भौतिक बाधा के रूप में काम करती है।
सुरक्षा को और बढ़ाने के लिए लोहे की फेंसिंग के ऊपर कोबरा तार का जाल बिछाया जाता है। यह तार चढ़ने वालों को बाधा में चढ़ने से रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे भौतिक सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण स्तर जुड़ता है।
इस प्रणाली को एंटी-ड्रोन तकनीक से भी लैस किया जा रहा है। डिजिटल निगरानी और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं का यह संयोजन वायुमार्ग से आने वाले खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को काफी हद तक बढ़ाएगा, जिससे सीमा सुरक्षा और प्रभावी होगी।
निर्माण प्रक्रिया में जमीन पर पहले एक ठोस कंक्रीट का आधार तैयार किया जाता है, जिससे संरचना को स्थिरता मिलती है। इसके बाद, इस कंक्रीट आधार पर लगभग दस फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग खड़ी की जाती है, जो अवैध पारगमन के खिलाफ एक प्राथमिक भौतिक बाधा के रूप में काम करती है।
सुरक्षा को और बढ़ाने के लिए लोहे की फेंसिंग के ऊपर कोबरा तार का जाल बिछाया जाता है। यह तार चढ़ने वालों को बाधा में चढ़ने से रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे भौतिक सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण स्तर जुड़ता है।
इस प्रणाली को एंटी-ड्रोन तकनीक से भी लैस किया जा रहा है। डिजिटल निगरानी और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं का यह संयोजन वायुमार्ग से आने वाले खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को काफी हद तक बढ़ाएगा, जिससे सीमा सुरक्षा और प्रभावी होगी।