📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Itzashwini
अपराध
सहरसा के डरहर गांव के पास कोसी नदी में गंगा डॉल्फिन का अवैध शिकार उजागर
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 25 अग. 2026, 09:37 AM
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सहरसा जिले के डरहर गांव के पास मछुआरों ने जाल में गंगा डॉल्फिन फँसाकर घर ले जाने का मामला सामने आया, जिससे कोसी नदी में अवैध शिकार की समस्या उजागर हुई।
सहरसा जिले के अधिकारियों ने कोसी नदी के डरहर गांव के पास गंगा डॉल्फिन (Platanista gangetica) के अवैध शिकार की सूचना दी है। स्थानीय स्रोतों के अनुसार, कुछ मछुआरों ने जाल से डॉल्फिन को फँसाया और नाव से अपने गांव तक ले गए।
गंगा डॉल्फिन 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है और इसका पकड़ना या मारना दंडनीय अपराध है। यह घटना दूरस्थ नदी क्षेत्रों में पारंपरिक मछली पकड़ने की प्रथाओं और संरक्षण नियमों के टकराव को दर्शाती है।
स्थानीय प्राधिकरण ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान और शिकार में प्रयुक्त उपकरणों को जब्त करने की योजना है। पर्यावरणीय NGOs ने कोसी नदी की निगरानी को कड़ा करने की मांग की है, क्योंकि यह डॉल्फिन की घटती जनसंख्या के लिए महत्वपूर्ण आवास है।
यह मामला बिहार में बढ़ते अवैध वन्यजीव व्यापार की चिंता को और बढ़ा रहा है, जिससे मछुआर समुदायों में संरक्षित प्रजातियों को नुकसान पहुँचाने के कानूनी परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
गंगा डॉल्फिन 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है और इसका पकड़ना या मारना दंडनीय अपराध है। यह घटना दूरस्थ नदी क्षेत्रों में पारंपरिक मछली पकड़ने की प्रथाओं और संरक्षण नियमों के टकराव को दर्शाती है।
स्थानीय प्राधिकरण ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान और शिकार में प्रयुक्त उपकरणों को जब्त करने की योजना है। पर्यावरणीय NGOs ने कोसी नदी की निगरानी को कड़ा करने की मांग की है, क्योंकि यह डॉल्फिन की घटती जनसंख्या के लिए महत्वपूर्ण आवास है।
यह मामला बिहार में बढ़ते अवैध वन्यजीव व्यापार की चिंता को और बढ़ा रहा है, जिससे मछुआर समुदायों में संरक्षित प्रजातियों को नुकसान पहुँचाने के कानूनी परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।