📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Timothy A. Gonsalves
मौसम
आईआईटी मंडी ने हिमाचल प्रदेश को ग्लेशियल जल बम खतरे की चेतावनी दी
✍️ WION
🗓 06 सित. 2026, 01:33 PM
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आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पिघलते ग्लेशियर अचानक बाढ़, यानी ‘ग्लेशियल जल बम’, का कारण बन सकते हैं, जो हिमाचल प्रदेश के जोखिमग्रस्त क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे।
आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने हिमाचल प्रदेश के हिमालयी क्षेत्रों में पिघलते ग्लेशियरों से अचानक जल निकासी के जोखिम को लेकर चेतावनी जारी की है। इस घटना को "ग्लेशियल जल बम" कहा गया है, जिसमें जल की तेज़ी से बहाव से नीचे के घाटियों में अचानक बाढ़ आ सकती है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि तापमान में वृद्धि और तेज़ ग्लेशियर पिघलाव इस प्रकार के जल बम के संभावित होने की संभावना को बढ़ा रहा है, जिससे नदी घाटियों में बसे लोगों को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने राज्य प्राधिकरणों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से ग्लेशियल झीलों की निगरानी को कड़ा करने और शीघ्र चेतावनी प्रणाली विकसित करने का आग्रह किया।
अभी तक कोई विशिष्ट घटना दर्ज नहीं हुई है, पर यह सलाह इस बात को रेखांकित करती है कि इस क्षेत्र में, जो मानसून के दौरान भूस्खलन और फ्लैश फ्लड के प्रति संवेदनशील है, तैयारी आवश्यक है। संस्थान स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जोखिम वाले क्षेत्रों का मानचित्रण करने और तकनीकी सहायता प्रदान करने की योजना बना रहा है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि तापमान में वृद्धि और तेज़ ग्लेशियर पिघलाव इस प्रकार के जल बम के संभावित होने की संभावना को बढ़ा रहा है, जिससे नदी घाटियों में बसे लोगों को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने राज्य प्राधिकरणों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से ग्लेशियल झीलों की निगरानी को कड़ा करने और शीघ्र चेतावनी प्रणाली विकसित करने का आग्रह किया।
अभी तक कोई विशिष्ट घटना दर्ज नहीं हुई है, पर यह सलाह इस बात को रेखांकित करती है कि इस क्षेत्र में, जो मानसून के दौरान भूस्खलन और फ्लैश फ्लड के प्रति संवेदनशील है, तैयारी आवश्यक है। संस्थान स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जोखिम वाले क्षेत्रों का मानचित्रण करने और तकनीकी सहायता प्रदान करने की योजना बना रहा है।