📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President's Secretariat
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IEI‑JKSC ने जम्मू‑कश्मीर में जलवायु‑सहनशील, समावेशी आवास की माँग की
✍️ Kashmir Life
🗓 06 अक्टू. 2026, 03:15 AM
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इंडियन इंजीनियर्स इंस्टीट्यूशन के जम्मू‑कश्मीर स्टेट काउंसिल ने प्रदेश में जलवायु‑सहनशील और सभी वर्गों के लिए समावेशी आवास की आवश्यकता पर बल दिया है।
इंडियन इंजीनियर्स इंस्टीट्यूशन – जम्मू‑कश्मीर स्टेट काउंसिल (IEI‑JKSC) ने जलवायु‑सहनशील और समावेशी आवास के लिए एक औपचारिक अपील जारी की है। इस बयान में परिषद ने प्रदेश के निर्माण क्षेत्र की बढ़ती जलवायु‑संबंधी जोखिमों, जैसे तीव्र मौसम, भूस्खलन और भूकंपीय गतिविधियों को उजागर किया, और नई इमारतों में सुदृढ़ डिजाइन मानकों को अपनाने की मांग की।
परिषद ने यह भी कहा कि किफायती आवास सभी वर्गों के लिए सुलभ होना चाहिए, जिसमें कम‑आय वाले परिवार, विकलांग व्यक्ति और बुजुर्ग शामिल हैं। स्थानीय निर्माण प्रथाओं को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के साथ मिलाकर पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।
यह आह्वान राज्य सरकार की आगामी आवास योजनाओं से पहले आया है, और परिषद ने राष्ट्रीय जलवायु‑अनुकूलन नीतियों के अनुरूप दिशानिर्देश तैयार करने में तकनीकी सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है। संबंधित पक्षों से आने वाले हफ्तों में इन सिफ़ारिशों की समीक्षा की उम्मीद है।
IEI‑JKSC का लक्ष्य जलवायु जोखिमों से समुदायों की रक्षा करते हुए समान विकास को बढ़ावा देना है, जिससे जम्मू‑कश्मीर में भविष्य की शहरी योजना में स्थायित्व और समावेशिता दोनों को प्राथमिकता मिले।
परिषद ने यह भी कहा कि किफायती आवास सभी वर्गों के लिए सुलभ होना चाहिए, जिसमें कम‑आय वाले परिवार, विकलांग व्यक्ति और बुजुर्ग शामिल हैं। स्थानीय निर्माण प्रथाओं को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के साथ मिलाकर पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।
यह आह्वान राज्य सरकार की आगामी आवास योजनाओं से पहले आया है, और परिषद ने राष्ट्रीय जलवायु‑अनुकूलन नीतियों के अनुरूप दिशानिर्देश तैयार करने में तकनीकी सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है। संबंधित पक्षों से आने वाले हफ्तों में इन सिफ़ारिशों की समीक्षा की उम्मीद है।
IEI‑JKSC का लक्ष्य जलवायु जोखिमों से समुदायों की रक्षा करते हुए समान विकास को बढ़ावा देना है, जिससे जम्मू‑कश्मीर में भविष्य की शहरी योजना में स्थायित्व और समावेशिता दोनों को प्राथमिकता मिले।