📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Meadows Taylor; James Fergusson
स्थानीय
हुक्कीरी के 15वीं शताब्दी के गुंबदों को नई जान मिलने वाली है
✍️ Deccan Herald
🗓 02 अग. 2026, 10:36 AM
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कर्नाटक के हुक्कीरी में एक संरक्षण समूह ने 15वीं शताब्दी के गुंबदों की मरम्मत के लिए योजना बनाई है, जो वर्षों से जर्जर हो गए हैं।
कर्नाटक के हुक्कीरी नगर में स्थित एक संरक्षण समूह ने 15वीं शताब्दी के गुंबदों की मरम्मत के लिए योजना बनाई है, जो वर्षों से जर्जर हो गए हैं।
ये गुंबद, जो एक समय में नगर के प्राचीन मंदिरों और सार्वजनिक भवनों को सजाते थे, वैदिक काल के मध्यकालीन भारतीय-इस्लामी वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं। उनकी जटिल पत्थर की नक्काशी और विशिष्ट वक्रता विजयनगर काल की वास्तुशिल्प परंपराओं को दर्शाती है।
संरक्षण योजना, जिसे राज्य के विरासत विभाग ने मंजूरी दी है, में संरचनात्मक मजबूती, पत्थर की सतहों की सफ़ाई और गायब टाइलों का प्रतिस्थापन शामिल है। कार्य के लिए धनराशि राज्य अनुदान और निजी दान के संयोजन से जुटाई जाएगी, और कार्य प्रारम्भिक वर्ष के आरम्भ में शुरू होकर 18 महीनों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
स्थानीय निवासियों ने इस पहल का स्वागत किया है, इसे हुक्कीरी की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने का एक अवसर माना है। समुदाय के स्वयंसेवकों ने पहले ही स्थल पर प्रारम्भिक सफ़ाई कार्य शुरू कर दिया है।
मरम्मत के बाद, गुंबदों को विरासत पर्यटन का केंद्र बिंदु बनने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और कर्नाटक की वास्तुशिल्प विरासत का संरक्षण सुनिश्चित होगा।
ये गुंबद, जो एक समय में नगर के प्राचीन मंदिरों और सार्वजनिक भवनों को सजाते थे, वैदिक काल के मध्यकालीन भारतीय-इस्लामी वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं। उनकी जटिल पत्थर की नक्काशी और विशिष्ट वक्रता विजयनगर काल की वास्तुशिल्प परंपराओं को दर्शाती है।
संरक्षण योजना, जिसे राज्य के विरासत विभाग ने मंजूरी दी है, में संरचनात्मक मजबूती, पत्थर की सतहों की सफ़ाई और गायब टाइलों का प्रतिस्थापन शामिल है। कार्य के लिए धनराशि राज्य अनुदान और निजी दान के संयोजन से जुटाई जाएगी, और कार्य प्रारम्भिक वर्ष के आरम्भ में शुरू होकर 18 महीनों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
स्थानीय निवासियों ने इस पहल का स्वागत किया है, इसे हुक्कीरी की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने का एक अवसर माना है। समुदाय के स्वयंसेवकों ने पहले ही स्थल पर प्रारम्भिक सफ़ाई कार्य शुरू कर दिया है।
मरम्मत के बाद, गुंबदों को विरासत पर्यटन का केंद्र बिंदु बनने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और कर्नाटक की वास्तुशिल्प विरासत का संरक्षण सुनिश्चित होगा।