📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
अपराध
एचपी उच्च न्यायालय ने डीजीपी से बाल पीड़ितों की आयु सत्यापन दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया
✍️ Live Law
🗓 18 सित. 2026, 06:37 PM
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने डीजीपी से बाल पीड़ितों की आयु प्रमाणित करने हेतु दिशा-निर्देश तैयार करने का आदेश दिया, बार-बार जांच में हुई कमियों का हवाला देते हुए।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक निर्णय में पुलिस प्रमुख (डीजीपी) को बाल पीड़ितों की आयु सत्यापित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करने और जारी करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने बताया कि जांच प्रक्रिया में बार‑बार हुई कमियों के कारण नाबालिगों पर गलत आरोप लगने और न्यायिक त्रुटियों के मामले सामने आए हैं। इसलिए एक मानकीकृत आयु निर्धारण पद्धति की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इन दिशा‑निर्देशों में फोरेंसिक तरीकों, दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं और बाल मनोवैज्ञानिकों व चिकित्सा विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रियाएँ शामिल होंगी। साथ ही पूछताछ और आरोप लगाने के दौरान आयु दावों की जाँच के लिए प्रोटोकॉल भी तय किये जाएँगे।
इस आदेश का उद्देश्य पुलिस बल को उचित प्रक्रिया का पालन कराना और नाबालिग पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना है, जिससे गलत दोषसिद्धियों का जोखिम कम हो और न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।
न्यायालय ने बताया कि जांच प्रक्रिया में बार‑बार हुई कमियों के कारण नाबालिगों पर गलत आरोप लगने और न्यायिक त्रुटियों के मामले सामने आए हैं। इसलिए एक मानकीकृत आयु निर्धारण पद्धति की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इन दिशा‑निर्देशों में फोरेंसिक तरीकों, दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं और बाल मनोवैज्ञानिकों व चिकित्सा विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रियाएँ शामिल होंगी। साथ ही पूछताछ और आरोप लगाने के दौरान आयु दावों की जाँच के लिए प्रोटोकॉल भी तय किये जाएँगे।
इस आदेश का उद्देश्य पुलिस बल को उचित प्रक्रिया का पालन कराना और नाबालिग पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना है, जिससे गलत दोषसिद्धियों का जोखिम कम हो और न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।