📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
देश
एचपी हाई कोर्ट ने सरोगेसी में माँ के अधिकारों को मान्यता दी
✍️ Live Law
🗓 07 सित. 2026, 01:03 PM
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि माँपन केवल जैविक या गर्भधारण संबंधों तक सीमित नहीं है और सरोगेसी में माँ के कानूनी अधिकारों को मान्यता दी।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि माँपन केवल जैविक या गर्भधारण संबंधों तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने यह पुष्टि की कि सरोगेसी अनुबंध करने वाली महिला को कानूनी रूप से जैविक माँ के समान अधिकार प्राप्त है।
न्यायालय ने तर्क दिया कि माँपन एक सामाजिक और कानूनी संबंध है, जो केवल जैविकता से परे है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि सहायक प्रजनन के मामलों में पक्षों की मंशा की रक्षा करना आवश्यक है।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि कमिशनिंग माँ को जन्म प्रमाणपत्र और संबंधित दस्तावेज़ों में कानूनी माता के रूप में दर्ज किया जाएगा। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुख देश भर में चल रहे सरोगेसी विवादों को प्रभावित कर सकता है और सहायक प्रजनन तकनीकों के नियमों की पुनः समीक्षा की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
अदालत ने भविष्य में ऐसे मामलों के निपटारे के लिए स्पष्ट विधायी ढाँचा बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे सरोगेट माँ, कमिशनिंग माता और बच्चे के हितों का संतुलन बना रहे।
न्यायालय ने तर्क दिया कि माँपन एक सामाजिक और कानूनी संबंध है, जो केवल जैविकता से परे है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि सहायक प्रजनन के मामलों में पक्षों की मंशा की रक्षा करना आवश्यक है।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि कमिशनिंग माँ को जन्म प्रमाणपत्र और संबंधित दस्तावेज़ों में कानूनी माता के रूप में दर्ज किया जाएगा। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुख देश भर में चल रहे सरोगेसी विवादों को प्रभावित कर सकता है और सहायक प्रजनन तकनीकों के नियमों की पुनः समीक्षा की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
अदालत ने भविष्य में ऐसे मामलों के निपटारे के लिए स्पष्ट विधायी ढाँचा बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे सरोगेट माँ, कमिशनिंग माता और बच्चे के हितों का संतुलन बना रहे।