📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Basile Morin
जीवनशैली
दीवार या टंकी से पीपल के पौधे को नुकसान बिना निकालने का आसान तरीका
✍️ Aaj Tak
🗓 13 सित. 2026, 07:22 PM
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विशेषज्ञों का कहना है कि दीवारों या पानी की टंकी के पास उगे पीपल के पौधों को जोर से खींचना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे संरचनात्मक दरारें बढ़ सकती हैं। दोबारा उगने से बचने के लिए जड़ों को सावधानी से निकालने की विधि अपनाई जानी चाहिए।
भारत में घरों की छतों, दीवारों या पानी की टंकी के पास अक्सर पीपल के पौधे उगते देखे जाते हैं। हालाँकि, ये पौधे बेहद हानिकारक हो सकते हैं यदि उनकी जड़ों का सही तरीके से प्रबंधन न किया जाए, क्योंकि ये इमारत की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
हाल ही में दी गई घर की देखभाल से जुड़ी सलाह के अनुसार, इन पौधों को जोर से खींचकर निकालना एक आम गलती है। इस प्रक्रिया में अक्सर जड़ें दीवार के अंदर ही टूट जाती हैं और पूरी तरह बाहर नहीं निकल पातीं। बची हुई जड़ों से पौधा दोबारा उग आता है और दीवारों में मौजूद दरारें और भी बढ़ जाती हैं।
संरचनात्मक नुकसान से बचने के लिए, पौधे को उसकी पूरी जड़ समेत निकालने की विधि अपनाई जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि दीवार या टंकी की संरचना में जड़ों का कोई हिस्सा बचा न रहे, जिससे भविष्य में नुकसान और बार-बार पौधे को हटाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
यह व्यावहारिक सुझाव आवासीय बुनियादी ढांचे की सावधानी से देखभाल की महत्वपूर्णता पर प्रकाश डालता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां प्राकृतिक वनस्पतियाँ निर्मित पर्यावरण से जुड़ी होती हैं।
हाल ही में दी गई घर की देखभाल से जुड़ी सलाह के अनुसार, इन पौधों को जोर से खींचकर निकालना एक आम गलती है। इस प्रक्रिया में अक्सर जड़ें दीवार के अंदर ही टूट जाती हैं और पूरी तरह बाहर नहीं निकल पातीं। बची हुई जड़ों से पौधा दोबारा उग आता है और दीवारों में मौजूद दरारें और भी बढ़ जाती हैं।
संरचनात्मक नुकसान से बचने के लिए, पौधे को उसकी पूरी जड़ समेत निकालने की विधि अपनाई जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि दीवार या टंकी की संरचना में जड़ों का कोई हिस्सा बचा न रहे, जिससे भविष्य में नुकसान और बार-बार पौधे को हटाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
यह व्यावहारिक सुझाव आवासीय बुनियादी ढांचे की सावधानी से देखभाल की महत्वपूर्णता पर प्रकाश डालता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां प्राकृतिक वनस्पतियाँ निर्मित पर्यावरण से जुड़ी होती हैं।