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29 अक्टू. 2026•
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इज़राइल के कनेसैट चुनाव और भारत की मतदान प्रणाली में अंतर
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Knesset photographer
विदेश

इज़राइल के कनेसैट चुनाव और भारत की मतदान प्रणाली में अंतर

✍️ The Hindu 🗓 29 अक्टू. 2026, 04:30 AM 👁 15
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द हिन्दू ने इज़राइल के कनेसैट चुनाव की प्रक्रिया को भारत की प्रथम-स्थान-प्राप्ति प्रणाली से तुलना करके मुख्य अंतर बताए हैं।

इज़राइल के कनेसैट चुनाव पूरे देश को एक ही निर्वाचन क्षेत्र मानते हुए अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली पर आधारित हैं। मतदाता किसी व्यक्तिगत उम्मीदवार के बजाय पार्टी को वोट देते हैं, और 120 सदस्यीय कनेसैट में सीटें प्रत्येक पार्टी के कुल वोट प्रतिशत के अनुसार वितरित होती हैं, बशर्ते वह 3.25% की न्यूनतम सीमा पार करे।

भारत में लोकसभा चुनाव प्रथम-स्थान-प्राप्ति (फ़र्स्ट‑पास्ट‑द‑पोस्ट) प्रणाली के तहत 543 एकल‑सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों में होते हैं। मतदाता अपने क्षेत्र के उम्मीदवार को चुनते हैं, और सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है, चाहे पार्टी का राष्ट्रीय वोट शेयर कुछ भी हो।

इज़राइल की प्रणाली पूरे देश को एक ही मतदाता पूल बनाकर क्षेत्रीय विभाजन को समाप्त करती है, जबकि भारत की क्षेत्रीय आधार पर आधारित प्रणाली अक्सर राष्ट्रीय वोट शेयर और संसद में सीटों के बीच असंतुलन पैदा करती है। दोनों ही तरीकों का उद्देश्य मतदाता की इच्छा को प्रतिबिंबित करना है, परन्तु सीटों में परिवर्तन के नियम काफी अलग हैं।

इन मौलिक अंतर को समझने से दोनों लोकतंत्रों में गठबंधन राजनीति और पार्टी रणनीतियों की जटिलता को बेहतर ढंग से पढ़ा जा सकता है।
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