📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईएफएस, आईपीएस की संख्या घटाकर खर्च घटाने की योजना
✍️ NDTV
🗓 19 अग. 2026, 12:03 AM
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए आईएएस, आईएफएस और आईपीएस अधिकारियों की संख्या घटाने की योजना घोषित की है।
नई दिल्ली – हिमाचल प्रदेश सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की संख्या घटाने की योजना पेश की है। यह कदम राज्य के प्रशासनिक खर्च को नियंत्रित करने और वित्तीय दक्षता बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह कमी आंतरिक पुनर्संरचना के माध्यम से की जाएगी, जबकि तत्काल बर्खास्तगी की कोई योजना नहीं है; विशिष्ट समय‑सीमा अभी तक नहीं बताई गई है। इस प्रस्ताव पर आगामी राज्य कैबिनेट बैठक में चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद ही औपचारिक आदेश जारी किए जाएंगे। यदि मंजूर हो जाता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी नौकरशाही खर्च को संकुचित करने का एक मॉडल बन सकता है।
यह निर्णय सीमित संसाधनों को संभालने के लिए राज्य सरकारों पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है, जबकि सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखी जानी चाहिए। पदों की सटीक संख्या अभी नहीं बताई गई, पर सरकार ने कहा कि यह समायोजन विभागों में दोहराव या ओवरलैप वाले पदों को लक्षित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सुधार पारदर्शी तरीके से लागू किया गया तो प्रशासनिक प्रभावशीलता को नुकसान पहुँचाए बिना मामूली बचत संभव है।
वरिष्ठ अधिकारियों और विपक्षी नेताओं सहित सभी हितधारकों को इस मसौदा योजना पर अपनी राय देने के लिए आमंत्रित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल लागत घटाने के उद्देश्य से है और यह नौकरशाही के किसी भी प्रकार के राजनीतिकरण को दर्शाती नहीं है।
यह निर्णय सीमित संसाधनों को संभालने के लिए राज्य सरकारों पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है, जबकि सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखी जानी चाहिए। पदों की सटीक संख्या अभी नहीं बताई गई, पर सरकार ने कहा कि यह समायोजन विभागों में दोहराव या ओवरलैप वाले पदों को लक्षित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सुधार पारदर्शी तरीके से लागू किया गया तो प्रशासनिक प्रभावशीलता को नुकसान पहुँचाए बिना मामूली बचत संभव है।
वरिष्ठ अधिकारियों और विपक्षी नेताओं सहित सभी हितधारकों को इस मसौदा योजना पर अपनी राय देने के लिए आमंत्रित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल लागत घटाने के उद्देश्य से है और यह नौकरशाही के किसी भी प्रकार के राजनीतिकरण को दर्शाती नहीं है।