📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
बिज़नेस
हिमाचल के व्यक्ति को बीयर बोतल पर अतिरिक्त शुल्क के बाद 12,500 रुपये की भरपाई
✍️ The Indian Express
🗓 06 अक्टू. 2026, 09:16 PM
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हिमाचल प्रदेश के एक उपभोक्ता को बीयर बोतल पर अतिरिक्त 75 रुपये चार्ज करने वाले शराब की दुकान से 12,500 रुपये की भरपाई मिली, जो उपभोक्ता न्यायालय ने मान्य किया।
हिमाचल प्रदेश के उपभोक्ता न्यायालय ने एक स्थानीय निवासी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसने शराब की दुकान पर बीयर बोतल के लिए अतिरिक्त 75 रुपये चार्ज करने के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। शिकायतकर्ता ने कहा कि यह अतिरिक्त शुल्क उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन है और उसने भरपाई की मांग की।
सुनवाई के दौरान दुकान के मालिक ने स्वीकार किया कि शेल्फ पर दिखाए गए मूल्य और काउंटर पर ली गई राशि में अंतर था, जिससे अतिरिक्त शुल्क लगा। न्यायालय ने रसीदों और मूल्य लेबलों की जांच कर यह निष्कर्ष निकाला कि यह असमान व्यापार प्रथा है।
परिणामस्वरूप, न्यायालय ने दुकान को उपभोक्ता को 12,500 रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया, साथ ही भविष्य में मूल्य लेबल को वास्तविक बिक्री मूल्य के अनुरूप रखने का निर्देश भी दिया गया।
उपभोक्ता अधिकार समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया, यह कहते हुए कि यह खुदरा दुकानों में पारदर्शी मूल्य निर्धारण की आवश्यकता को सुदृढ़ करता है, विशेषकर शराब जैसी वस्तुओं के लिए, जिन पर कड़ी नियामक निगरानी होती है।
यह मामला भारतीय उपभोक्ताओं में मूल्य हेरफेर के खिलाफ कानूनी उपायों के प्रति बढ़ती जागरूकता को उजागर करता है और उपभोक्ता न्यायालयों की भूमिका को निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं की रक्षा में रेखांकित करता है।
सुनवाई के दौरान दुकान के मालिक ने स्वीकार किया कि शेल्फ पर दिखाए गए मूल्य और काउंटर पर ली गई राशि में अंतर था, जिससे अतिरिक्त शुल्क लगा। न्यायालय ने रसीदों और मूल्य लेबलों की जांच कर यह निष्कर्ष निकाला कि यह असमान व्यापार प्रथा है।
परिणामस्वरूप, न्यायालय ने दुकान को उपभोक्ता को 12,500 रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया, साथ ही भविष्य में मूल्य लेबल को वास्तविक बिक्री मूल्य के अनुरूप रखने का निर्देश भी दिया गया।
उपभोक्ता अधिकार समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया, यह कहते हुए कि यह खुदरा दुकानों में पारदर्शी मूल्य निर्धारण की आवश्यकता को सुदृढ़ करता है, विशेषकर शराब जैसी वस्तुओं के लिए, जिन पर कड़ी नियामक निगरानी होती है।
यह मामला भारतीय उपभोक्ताओं में मूल्य हेरफेर के खिलाफ कानूनी उपायों के प्रति बढ़ती जागरूकता को उजागर करता है और उपभोक्ता न्यायालयों की भूमिका को निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं की रक्षा में रेखांकित करता है।