📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Greenpenguin3459
स्थानीय
हिमाचल हाई कोर्ट ने कसोल‑मनाली के जंगल में रेव पार्टी पर आपत्तियों की सुनवाई तय
✍️ Himachal Scape
🗓 22 अक्टू. 2026, 01:35 AM
👁 18
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कसोल‑मनाली के जंगल में आयोजित रेव पार्टियों के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों पर विचार करने का निर्णय लिया।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कसोल‑मनाली के निकट स्थित वन क्षेत्रों में आयोजित रेव पार्टियों के खिलाफ दायर आपत्तियों की सुनवाई का समय निर्धारित किया है। पर्यावरण संगठनों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि बड़े पैमाने पर संगीत, भीड़ और अस्थायी ढांचों से इन पहाड़ी क्षेत्रों की नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है और वन्यजीवों में बाधा उत्पन्न हो रही है।
राज्य प्राधिकरणों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ऐसे कार्यक्रम वन संरक्षण नियमों का उल्लंघन करते हैं और बिना अनुमति के आयोजित नहीं किए जा सकते। आपत्तियों में हिमाचल प्रदेश वन अधिनियम के संभावित उल्लंघन, कचरा प्रबंधन, शोर प्रदूषण और वन में आग लगने के जोखिम को उजागर किया गया है।
कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि इन पार्टियों को जारी रखा जा सकता है, स्थानांतरित किया जाना चाहिए या पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। वन विभाग के अधिकारी अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने और उचित प्रवर्तन उपाय सुझाने के लिए बेंच के सामने पेश होने की संभावना है।
यदि हाई कोर्ट आयोजकों के खिलाफ फैसला देता है, तो यह राज्य भर में संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में बड़े इवेंट्स पर कड़ी निगरानी का precedent स्थापित कर सकता है, जिससे पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
राज्य प्राधिकरणों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ऐसे कार्यक्रम वन संरक्षण नियमों का उल्लंघन करते हैं और बिना अनुमति के आयोजित नहीं किए जा सकते। आपत्तियों में हिमाचल प्रदेश वन अधिनियम के संभावित उल्लंघन, कचरा प्रबंधन, शोर प्रदूषण और वन में आग लगने के जोखिम को उजागर किया गया है।
कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि इन पार्टियों को जारी रखा जा सकता है, स्थानांतरित किया जाना चाहिए या पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। वन विभाग के अधिकारी अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने और उचित प्रवर्तन उपाय सुझाने के लिए बेंच के सामने पेश होने की संभावना है।
यदि हाई कोर्ट आयोजकों के खिलाफ फैसला देता है, तो यह राज्य भर में संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में बड़े इवेंट्स पर कड़ी निगरानी का precedent स्थापित कर सकता है, जिससे पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।