📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
शिक्षा
हिमाचल के राज्यपाल ने काउटिल्य के अर्थशास्त्र में मानवाधिकार पर पुस्तक जारी की
✍️ The Tribune
🗓 23 सित. 2026, 08:46 AM
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने ‘ह्यूमन राइट्स इन काउटिल्य के अर्थशास्त्र’ शीर्षक पुस्तक का विमोचन किया, जिसमें प्राचीन ग्रंथ को आधुनिक मानवाधिकार दृष्टिकोण से देखा गया है।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने “ह्यूमन राइट्स इन काउटिल्य के अर्थशास्त्र” नामक विद्वतापूर्ण पुस्तक के विमोचन का संचालन किया। इस समारोह में प्राचीन काउटिल्य ग्रंथ का अध्ययन कर उसे आधुनिक मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने वाले इस कार्य को औपचारिक रूप से प्रकाशित किया गया।
पुस्तक के लेखक, जो प्राचीन भारतीय राजनैतिक विचारों के विशेषज्ञ हैं, यह तर्क देते हैं कि अर्थशास्त्र में वर्णित कई सिद्धांत आज के व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और कानून के शासन से मेल खाते हैं। काउटिल्य के 4वीं शताब्दी ईसा पूर्व के ग्रंथ को वर्तमान मानवाधिकार ढांचों के साथ तुलना करके लेखक इसका सार्वभौमिक महत्व उजागर करना चाहते हैं।
राज्यपाल ने इस पहल को भारतीय शास्त्रों को पुनः पढ़ने और उनके माध्यम से समकालीन नीति‑निर्माण एवं संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा को प्रोत्साहित करने के अवसर के रूप में सराहा। इस पुस्तक के विमोचन से शास्त्रीय राजनैतिक सिद्धांतों और आधुनिक अधिकार‑व्यवस्थाओं के संगम पर आगे शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पुस्तक के लेखक, जो प्राचीन भारतीय राजनैतिक विचारों के विशेषज्ञ हैं, यह तर्क देते हैं कि अर्थशास्त्र में वर्णित कई सिद्धांत आज के व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और कानून के शासन से मेल खाते हैं। काउटिल्य के 4वीं शताब्दी ईसा पूर्व के ग्रंथ को वर्तमान मानवाधिकार ढांचों के साथ तुलना करके लेखक इसका सार्वभौमिक महत्व उजागर करना चाहते हैं।
राज्यपाल ने इस पहल को भारतीय शास्त्रों को पुनः पढ़ने और उनके माध्यम से समकालीन नीति‑निर्माण एवं संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा को प्रोत्साहित करने के अवसर के रूप में सराहा। इस पुस्तक के विमोचन से शास्त्रीय राजनैतिक सिद्धांतों और आधुनिक अधिकार‑व्यवस्थाओं के संगम पर आगे शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।