📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harshit SR
धर्म
उत्ताखंड में हिमकुंड साहिब के द्वार शीतकाल के लिए बंद
✍️ Dainik Bhaskar
🗓 10 अक्टू. 2026, 06:47 PM
👁 18
हिमकुंड साहिब, उत्तराखंड का पवित्र तीर्थस्थल, भारी बर्फबारी और जोखिमपूर्ण मौसम के कारण शीतकाल के लिए बंद कर दिया गया है।
शिरोमणि गुरुद्वारा परबन्धक समिति (SGPC) ने घोषणा की है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित उच्च altitude वाला पवित्र तीर्थस्थल हिमकुंड साहिब शीतकाल के दौरान बंद रहेगा। लगातार बर्फबारी और शून्य से नीचे तापमान ने तीर्थयात्रियों और कर्मचारियों दोनों के लिए मार्ग को असुरक्षित बना दिया है।
प्राधिकरणों ने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे बर्फ पिघलने तक, आमतौर पर अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत तक, यात्रा को स्थगित रखें। गोविंदघाट और घनगारी में अस्थायी आश्रयस्थल खुला रहेगा, जहाँ पहले से मौजूद यात्रियों को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
यह बंदी उन हजारों तीर्थयात्रियों को प्रभावित करती है जो सामान्यतः गर्मियों में 20 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करके इस स्थल तक पहुँचते हैं। SGPC ने कहा कि मौसम की स्थिति पर नज़र रखी जाएगी और सुरक्षित होने पर आधिकारिक पुनः खोलने की सूचना जारी की जाएगी।
स्थानीय पर्यटन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि आधिकारिक पुनः खोलने तक हिमकुंड साहिब के लिए गाइडेड ट्रेक को रोकें, ताकि खतरनाक पहाड़ी मार्ग में दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
यह कदम हिमालय में जलवायु‑प्रेरित मौसम पैटर्न की चुनौतियों और दूरस्थ धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा‑पहले नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
प्राधिकरणों ने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे बर्फ पिघलने तक, आमतौर पर अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत तक, यात्रा को स्थगित रखें। गोविंदघाट और घनगारी में अस्थायी आश्रयस्थल खुला रहेगा, जहाँ पहले से मौजूद यात्रियों को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
यह बंदी उन हजारों तीर्थयात्रियों को प्रभावित करती है जो सामान्यतः गर्मियों में 20 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करके इस स्थल तक पहुँचते हैं। SGPC ने कहा कि मौसम की स्थिति पर नज़र रखी जाएगी और सुरक्षित होने पर आधिकारिक पुनः खोलने की सूचना जारी की जाएगी।
स्थानीय पर्यटन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि आधिकारिक पुनः खोलने तक हिमकुंड साहिब के लिए गाइडेड ट्रेक को रोकें, ताकि खतरनाक पहाड़ी मार्ग में दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
यह कदम हिमालय में जलवायु‑प्रेरित मौसम पैटर्न की चुनौतियों और दूरस्थ धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा‑पहले नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।