📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash.dwivedi
मौसम
भोपाल में भारी बारिश, मानसून फिर सक्रिय, नर्मदापुरम में 3.7 इंच पानी
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 24 अग. 2026, 07:36 PM
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मध्य प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय, भोपाल व आसपास के जिलों में तेज़ बारिश, नर्मदापुरम में 24 घंटे में औसतन 3.7 इंच पानी गिरा।
मध्य प्रदेश में मानसून की धारा फिर से सक्रिय हुई, जिससे भोपाल, विदिशा, रायसेन और शाजापुर सहित कई जिलों में तेज़ बारिश हुई। मौसम विभाग ने बताया कि कुछ ही घंटों में बारिश तीव्र हो गई और स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ की संभावनाओं को देखते हुए चेतावनी जारी की।
नर्मदापुरम संभाग में पिछले 24 घंटे में औसतन 3.7 इंच (लगभग 94 मिमी) पानी गिरा, जो इस मौसम की अब तक की सबसे अधिक एक‑दिन की मात्रा में से एक है। जिले ने बाढ़ चेतावनी प्रणाली सक्रिय कर ली है और निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
भारत मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 24 घंटे में डिंडौरी और बालाघाट में 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। आपातकालीन सेवाएँ तैयार हैं, और राज्य आपदा प्रतिक्रिया टीम नदी स्तर और सड़कों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है।
प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, आपातकालीन किट तैयार रखने और स्थानीय मीडिया एवं आधिकारिक चैनलों से अपडेट लेते रहने का अनुरोध किया है। आगामी दिनों में मानसून की सक्रियता जारी रहने की संभावना है, जिससे जल‑संकटग्रस्त क्षेत्रों को राहत मिलती रहेगी, परन्तु बाढ़‑प्रवण क्षेत्रों में अल्पकालिक चुनौतियाँ भी बनी रहेंगी।
नर्मदापुरम संभाग में पिछले 24 घंटे में औसतन 3.7 इंच (लगभग 94 मिमी) पानी गिरा, जो इस मौसम की अब तक की सबसे अधिक एक‑दिन की मात्रा में से एक है। जिले ने बाढ़ चेतावनी प्रणाली सक्रिय कर ली है और निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
भारत मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 24 घंटे में डिंडौरी और बालाघाट में 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। आपातकालीन सेवाएँ तैयार हैं, और राज्य आपदा प्रतिक्रिया टीम नदी स्तर और सड़कों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है।
प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, आपातकालीन किट तैयार रखने और स्थानीय मीडिया एवं आधिकारिक चैनलों से अपडेट लेते रहने का अनुरोध किया है। आगामी दिनों में मानसून की सक्रियता जारी रहने की संभावना है, जिससे जल‑संकटग्रस्त क्षेत्रों को राहत मिलती रहेगी, परन्तु बाढ़‑प्रवण क्षेत्रों में अल्पकालिक चुनौतियाँ भी बनी रहेंगी।