📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pic Boy 101 / Vikrant / Tom Mundakel / Aniket Anan
विज्ञान
झारखंड के हजारीबाग को संकटग्रस्त गिद्धों का सुरक्षित अभयारण्य घोषित
✍️ The New Indian Express
🗓 23 सित. 2026, 04:01 AM
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एक हालिया सर्वेक्षण ने झारखंड के हजारीबाग को संकटग्रस्त गिद्धों के सुरक्षित आवास के रूप में पहचाना।
पर्यावरणीय सर्वेक्षणों ने झारखंड के हजारीबाग को कई संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के लिए उपयुक्त आश्रयस्थल बताया है। यहाँ की चट्टानी चट्टानें और खुले घास के मैदान नेड़िंग के लिए अनुकूल स्थल और पर्याप्त मृत पशु प्रदान करते हैं, जो इन पक्षियों के जीवन के लिए आवश्यक है। संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में मानव हस्तक्षेप कम रहा, जिससे गिद्धों की आबादी राष्ट्रीय स्तर पर गिरावट के बाद स्थिर हो रही है।
स्थानीय प्रशासन अब इस आवास की निगरानी कर रहा है ताकि खनन या अनियंत्रित कचरा निपटान जैसी गतिविधियाँ पक्षियों को खतरे में न डालें। वन्यजीव NGOs के साथ मिलकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे गिद्धों की प्रजनन और भोजन चक्र सुरक्षित रहे।
हजारीबाग को सुरक्षित आवास के रूप में मान्यता देना मध्य भारत में प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है और अन्य क्षेत्रों के लिए भी गिद्धों की संख्या बढ़ाने हेतु आवास संरक्षण और समुदाय जागरूकता के मॉडल प्रस्तुत करता है।
स्थानीय प्रशासन अब इस आवास की निगरानी कर रहा है ताकि खनन या अनियंत्रित कचरा निपटान जैसी गतिविधियाँ पक्षियों को खतरे में न डालें। वन्यजीव NGOs के साथ मिलकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे गिद्धों की प्रजनन और भोजन चक्र सुरक्षित रहे।
हजारीबाग को सुरक्षित आवास के रूप में मान्यता देना मध्य भारत में प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है और अन्य क्षेत्रों के लिए भी गिद्धों की संख्या बढ़ाने हेतु आवास संरक्षण और समुदाय जागरूकता के मॉडल प्रस्तुत करता है।