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हरियाणा ने भारत‑यूके CETA के तहत नई निर्यात व निवेश संभावनाओं की तलाश की, सैनी ने कहा
✍️ knnindia.co.in
🗓 16 सित. 2026, 04:02 AM
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राज्य अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा भारत‑यूके व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के माध्यम से निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने के अवसरों का मूल्यांकन कर रहा है।
नई दिल्ली – हरियाणा सरकार ने बताया कि वह भारत‑यूके व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CETA) से उत्पन्न हो सकने वाले निर्यात और निवेश के अवसरों की समीक्षा कर रही है। वरिष्ठ अधिकारी सैनी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य समझौते द्वारा प्रदान किए गए कम टैरिफ़ और नियामक संरेखण का उपयोग करना है।
बयान के अनुसार, राज्य कृषि, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सेवाओं जैसे अपने मौजूदा मजबूत क्षेत्रों पर ध्यान देगा, ताकि यूके बाजार में प्रवेश किया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि हरियाणा‑आधारित कंपनियों को ब्रिटिश निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें राज्य की बुनियादी ढाँचा और कुशल कार्यबल को प्रमुख बिंदु बनाया जाएगा।
यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए CETA पर हस्ताक्षर के बाद उठाया गया है। हरियाणा की पहल राष्ट्रीय स्तर पर द्विपक्षीय व्यापार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ाने के व्यापक प्रयासों को समर्थन देती है।
राज्य के प्रतिनिधियों ने कहा कि विस्तृत कार्य योजना आने वाले हफ़्तों में तैयार की जाएगी, जिसमें वाणिज्य विभाग और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय होगा ताकि ठोस अवसरों की पहचान की जा सके।
समझौते के प्रावधान लागू होते ही सरकार प्रगति की निगरानी करेगी और परिणामों की रिपोर्ट करेगी, जिससे नई व्यापार व्यवस्था में हरियाणा की सक्रिय भूमिका स्पष्ट होगी।
बयान के अनुसार, राज्य कृषि, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सेवाओं जैसे अपने मौजूदा मजबूत क्षेत्रों पर ध्यान देगा, ताकि यूके बाजार में प्रवेश किया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि हरियाणा‑आधारित कंपनियों को ब्रिटिश निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें राज्य की बुनियादी ढाँचा और कुशल कार्यबल को प्रमुख बिंदु बनाया जाएगा।
यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए CETA पर हस्ताक्षर के बाद उठाया गया है। हरियाणा की पहल राष्ट्रीय स्तर पर द्विपक्षीय व्यापार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ाने के व्यापक प्रयासों को समर्थन देती है।
राज्य के प्रतिनिधियों ने कहा कि विस्तृत कार्य योजना आने वाले हफ़्तों में तैयार की जाएगी, जिसमें वाणिज्य विभाग और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय होगा ताकि ठोस अवसरों की पहचान की जा सके।
समझौते के प्रावधान लागू होते ही सरकार प्रगति की निगरानी करेगी और परिणामों की रिपोर्ट करेगी, जिससे नई व्यापार व्यवस्था में हरियाणा की सक्रिय भूमिका स्पष्ट होगी।