“हर मंदिर में बने दूध संग्रह की व्यवस्था, नालियों में नहीं बेसहारा जीवों के पेट में जाए दूध:
‘दूध नालियों में बहाने के बजाय बेसहारा जीवों की भूख मिटाएं’, राम पंडा की देशभर के मंदिरों से अपील
हिंडौन सिटी। मंदिरों में भगवान शिव के शिवलिंग पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दूध को नालियों में बहने से रोकने की पहल अब जीव सेवा का संदेश दे रही है। राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम पंडा ने मंदिरों में विशेष व्यवस्था शुरू कराई है, जिसके तहत शिवलिंग पर चढ़ने वाला दूध नाली में जाने के बजाय एक टब में एकत्र किया जाता है और बाद में उसे बेसहारा कुत्तों और बिल्लियों को दिया जाता है।
राम पंडा का कहना है कि “जब दूध किसी जीव की भूख मिटा सकता है तो उसे नाली में बहाने का कोई औचित्य नहीं है।” उनका आग्रह है कि देशभर के सभी मंदिरों में इसी तरह की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि आस्था के रूप में चढ़ाया जाने वाला दूध व्यर्थ न जाए और उसका सदुपयोग जीव सेवा में हो।
उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-पाठ के केंद्र नहीं, बल्कि दया, करुणा और सेवा की प्रेरणा देने वाले स्थान भी हैं। यदि हर मंदिर में दूध को एकत्र करने की व्यवस्था की जाए तो बड़ी मात्रा में दूध बेसहारा पशुओं के काम आ सकता है।
इस पहल के जरिए राम पंडा ने धार्मिक आस्था को जीव दया और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश दिया है। उनका कहना है कि श्रद्धा से भगवान को अर्पित की जाने वाली वस्तु का सम्मान तभी सार्थक है, जब उसका सदुपयोग भी हो और उससे किसी जरूरतमंद जीव को लाभ मिले।
राम पंडा का कहना है कि “जब दूध किसी जीव की भूख मिटा सकता है तो उसे नाली में बहाने का कोई औचित्य नहीं है।” उनका आग्रह है कि देशभर के सभी मंदिरों में इसी तरह की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि आस्था के रूप में चढ़ाया जाने वाला दूध व्यर्थ न जाए और उसका सदुपयोग जीव सेवा में हो।
उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-पाठ के केंद्र नहीं, बल्कि दया, करुणा और सेवा की प्रेरणा देने वाले स्थान भी हैं। यदि हर मंदिर में दूध को एकत्र करने की व्यवस्था की जाए तो बड़ी मात्रा में दूध बेसहारा पशुओं के काम आ सकता है।
इस पहल के जरिए राम पंडा ने धार्मिक आस्था को जीव दया और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश दिया है। उनका कहना है कि श्रद्धा से भगवान को अर्पित की जाने वाली वस्तु का सम्मान तभी सार्थक है, जब उसका सदुपयोग भी हो और उससे किसी जरूरतमंद जीव को लाभ मिले।