स्थानीय
हजारीबाग में 50 पैरा-लीगल वॉलंटियर्स को बाल संरक्षण प्रशिक्षण, बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आज हजारीबाग में 50 पैरा-लीगल वॉलंटियर्स को बाल संरक्षण, पीओसीएसओ अधिनियम और फोस्टर केयर पर एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया, जिससे जमीनी स्तर पर बच्चों के अधिकारों की रक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।
आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने हजारीबाग के भवन में 50 पैरा-लीगल वॉलंटियर्स को बाल संरक्षण, केस मैनेजमेंट, पीओसीएसओ अधिनियम, स्पॉन्सरशिप, फोस्टर केयर और आफ्टर केयर विषयों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पैरा-लीगल वॉलंटियर्स को बाल संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों, सरकारी योजनाओं और पुनर्वास सेवाओं की जानकारी देकर उनकी क्षमता को सुदृढ़ करना था, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर समय पर सहायता एवं कानूनी संरक्षण उपलब्ध करा सकें।
प्रशिक्षण के दौरान बाल संरक्षण एवं केस मैनेजमेंट के तहत जरूरतमंद बच्चों की पहचान, मामलों की रिपोर्टिंग, रेफरल तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। पीओसीएसओ अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, बाल यौन शोषण से संबंधित मामलों की पहचान, रिपोर्टिंग तथा पीड़ित बच्चों को आवश्यक संरक्षण एवं सहायता उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में मार्गदर्शन दिया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। यूनिसेफ के श्री गौरव कुमार (सीपीओ, यूनिसेफ) तथा अश्लेश, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी), पीआईसी/यूनिसेफ, हजारीबाग ने भी सहभागिता की। उदयन केयर सोसायटी, नई दिल्ली की मेन्टर–आफ्टर केयर रीता सिंह ने आफ्टर केयर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रशिक्षित पैरा-लीगल वॉलंटियर्स जमीनी स्तर पर बाल विवाह, बाल श्रम, बाल यौन शोषण, उपेक्षा एवं विद्यालय छोड़ने जैसी परिस्थितियों की पहचान कर संबंधित इकाइयों तक मामलों को पहुंचाने में सक्षम होंगे, जिससे हजारीबाग जिले में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने और विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पैरा-लीगल वॉलंटियर्स को बाल संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों, सरकारी योजनाओं और पुनर्वास सेवाओं की जानकारी देकर उनकी क्षमता को सुदृढ़ करना था, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर समय पर सहायता एवं कानूनी संरक्षण उपलब्ध करा सकें।
प्रशिक्षण के दौरान बाल संरक्षण एवं केस मैनेजमेंट के तहत जरूरतमंद बच्चों की पहचान, मामलों की रिपोर्टिंग, रेफरल तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। पीओसीएसओ अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, बाल यौन शोषण से संबंधित मामलों की पहचान, रिपोर्टिंग तथा पीड़ित बच्चों को आवश्यक संरक्षण एवं सहायता उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में मार्गदर्शन दिया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। यूनिसेफ के श्री गौरव कुमार (सीपीओ, यूनिसेफ) तथा अश्लेश, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी), पीआईसी/यूनिसेफ, हजारीबाग ने भी सहभागिता की। उदयन केयर सोसायटी, नई दिल्ली की मेन्टर–आफ्टर केयर रीता सिंह ने आफ्टर केयर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रशिक्षित पैरा-लीगल वॉलंटियर्स जमीनी स्तर पर बाल विवाह, बाल श्रम, बाल यौन शोषण, उपेक्षा एवं विद्यालय छोड़ने जैसी परिस्थितियों की पहचान कर संबंधित इकाइयों तक मामलों को पहुंचाने में सक्षम होंगे, जिससे हजारीबाग जिले में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने और विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।