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05 नव. 2026•
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हजारीबाग के केरेडारी में चंद्रगुप्त कोल परियोजना पर 36 घंटे का हाई‑वोल्टेज विरोध

✍️ रिपोर्टर: Akash Bharti 🗓 05 नव. 2026, 02:33 PM 👁 14
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स्थानीय बेरोजगार युवाओं ने सुशी इंफ्रा माइनिंग कंपनी के खिलाफ 36 घंटे का तीव्र आंदोलन किया, जिसमें विधायक‑मुखिया‑प्रमुख का दोहरा रवैया सामने आया।

36 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा: दिन में जनप्रतिनिधियों ने खाई 'जेल जाने' की कसमें, रात के अंधेरे में क्या पर्दे के पीछे बिक गया युवाओं का आंदोलन?

केरेडारी (हजारीबाग)
हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड स्थित पचड़ा पंचायत में सीसीएल की प्रस्तावित चंद्रगुप्त कोल परियोजना इन दिनों भ्रष्टाचार, वादाखिलाफी और राजनीतिक ड्रामे का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुकी है। यहाँ जमीन गई, जंगल उजड़े और आशियाने छिन गए, लेकिन स्थानीय बेरोजगार युवाओं के हिस्से में आया तो सिर्फ धोखा और दर-दर की ठोकरें। एमडीओ 'सुशी इंफ्रा माइनिंग कंपनी' के खिलाफ युवाओं का 36 घंटे तक चला वह ऐतिहासिक आंदोलन अब कई संगीन सवाल खड़े कर गया है—जिनका जवाब देने से आज बड़े-बड़े दिग्गज भी कतरा रहे हैं।

दिन का उजाला: नेताओं के भाषणों से गूंजा मंच और दहाड़े जनप्रतिनिधि
आंदोलन के 24 घंटे बीतते-बीतते जब मामला तूल पकड़ा, तो क्षेत्र के तमाम बड़े राजनीतिक चेहरे और जनप्रतिनिधि युवाओं के समर्थन में धरना स्थल पर जा पहुंचे। इनमें बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, केरेडारी प्रखंड प्रमुख सुनीता देवी, पचड़ा पंचायत के मुखिया महेश साव, उपमुखिया कलेश्वर महतो और जेएलकेएम नेत्री वर्षा कुमारी शामिल थीं।
मंच से एक के बाद एक तीखे भाषण दिए गए और नेताओं ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी:
विधायक रोशन लाल चौधरी ने तानते हुए कहा था— "आप लोग तैयार रहिए, जैसा आप कहेंगे, हम हर कदम पर आपके साथ चट्टान की तरह खड़े हैं।"
नेत्री वर्षा कुमारी ने आंदोलन को बेचने वालों को खुली चेतावनी दी थी कि अपना हो या पराया, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

मुखिया महेश साव ने सुशी कंपनी के जीएम आरएस यादव पर सरेआम वादाखिलाफी का गंभीर आरोप मढ़ा।
प्रमुख सुनीता देवी ने हुंकार भरी थी कि इस बार आर-पार की लड़ाई होगी, क्योंकि कंपनी सिर्फ झूठे आश्वासन दे रही है।
इन तमाम बड़े बयानों के बाद लगभग 10 घंटे तक खनन कार्य पूरी तरह ठप रहा और युवाओं को लगा कि शायद इस बार उन्हें उनका हक दिलाने वाला कोई मसीहा मिल गया है।

रात का अंधेरा और पलटी मारते समीकरण: आखिर क्या हुआ पर्दे के पीछे?
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने केरेडारी की राजनीति में भूचाल ला दिया। दिन के उजाले में जो नेता युवाओं के हक में जेल जाने और सीना तानकर लड़ने की कसमें खा रहे थे, चर्चा है कि रात के अंधेरे में उनके तेवर पूरी तरह बदल गए।
युवाओं का आरोप है कि जिन चेहरों ने दिन में कंपनी के खिलाफ आग उगली थी, रात होते ही वही पर्दे के पीछे कंपनी के सुर में सुर मिलाते नजर आए। सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा कौन सा 'खेल' या गुप्त समझौता हुआ, जिसके कारण बिना युवाओं को एक अदद रोजगार मिले ही आंदोलन की दिशा अचानक मोड़ दी गई? क्या जनता के अधिकार सिर्फ चुनावी रोटियां सेकने भर के लिए हैं?

दर्द की पराकाष्ठा: 100 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ा युवा, मची अफरातफरी
इस पूरे ड्रामे का सबसे खौफनाक और झकझोर देने वाला पहलू तब सामने आया, जब महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर थक चुके एक तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवक का धैर्य जवाब दे गया। पचड़ा पंचायत निवासी राहुल कुमार (पिता- जुगन साव) पिछले 6 महीनों से रोजगार के लिए भटक रहा था।
जब उसे चारों तरफ से निराशा हाथ लगी, तो उसने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला कर लिया। एक दर्दनाक वीडियो जारी करने के बाद राहुल सीधा 100 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर पर जा चढ़ा। इस घटना की खबर मिलते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। घंटों चली कड़ी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद किसी तरह उसे सुरक्षित नीचे उतारा गया। राहुल की जान तो बच गई, लेकिन इस घटना ने सिस्टम और नेताओं के वादों की पोल खोलकर रख दी है।

बाहरी बनाम स्थानीय: अब आर-पार के मूड में युवा
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय युवाओं में कंपनी और नेताओं के खिलाफ भयंकर गुस्सा सुलग रहा है। युवाओं का कहना है कि परियोजना के लिए जमीन यहाँ के लोगों ने दी, लेकिन तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे दूर-दराज के राज्यों से लोगों लाकर नौकरियां बांटी जा रही हैं।
अब आक्रोशित युवाओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बाहरी कर्मियों को खदेड़कर स्थानीय हितों की रक्षा नहीं की गई और कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों का घेराव नहीं हुआ, तो यह चिंगारी एक बड़े जन-विद्रोह का रूप ले लेगी। चौक-चौराहों पर अब एक ही चर्चा है— आखिरकार जनता के इन रहनुमाओं ने रातों-रात किसके इशारे पर युवाओं के भविष्य का सौदा कर लिया?
संवाददाता :- आकाश भारती, Need24 News
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