📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown authorUnknown author
धर्म
ग्वालियर में विजयदशमी पर 745 साधुओं की शौर्यगाथा का हुआ शस्त्रपूजन
✍️ Amar Ujala · Gwalior
🗓 20 अक्टू. 2026, 08:15 PM
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विजयदशमी पर ग्वालियर की गंगादास बड़ी शाला में 745 साधुओं की शौर्यगाथा को याद करते हुए शस्त्रों और तोप का पूजन किया गया।
ग्वालियर की ऐतिहासिक गंगादास बड़ी शाला में विजयदशमी के अवसर पर शस्त्रों और तोप को पूजनीय वस्तु बनाकर 745 साधुओं की वीरता को स्मरण किया गया।
ये साधु‑संत 1857 के विद्रोह में अंग्रेज़ सेना के विरुद्ध लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर चुके थे; उसी संघर्ष में रानी लक्ष्मीबाई का शरीर भी अंग्रेज़ों के हाथों से बचा रहा। उनका सामूहिक बलिदान इस क्षेत्र की शौर्यगाथा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
समारोह में तलवारें, बंदूकें और एक तोप को वेदी पर रखकर प्रार्थना की गई, जिससे सैन्य स्मृति को पारम्परिक धार्मिक अनुष्ठान के साथ जोड़ा गया। स्थानीय पुजारियों और सामुदायिक नेताओं सहित कई लोग इस अनुष्ठान में भाग लेकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे।
आयोजकों ने कहा कि गंगादास बड़ी शाला आज भी उन 745 साधुओं की जीवित गवाही है और इस प्रकार उनका स्मरण भविष्य की पीढ़ियों तक जीवित रहेगा।
ये साधु‑संत 1857 के विद्रोह में अंग्रेज़ सेना के विरुद्ध लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर चुके थे; उसी संघर्ष में रानी लक्ष्मीबाई का शरीर भी अंग्रेज़ों के हाथों से बचा रहा। उनका सामूहिक बलिदान इस क्षेत्र की शौर्यगाथा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
समारोह में तलवारें, बंदूकें और एक तोप को वेदी पर रखकर प्रार्थना की गई, जिससे सैन्य स्मृति को पारम्परिक धार्मिक अनुष्ठान के साथ जोड़ा गया। स्थानीय पुजारियों और सामुदायिक नेताओं सहित कई लोग इस अनुष्ठान में भाग लेकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे।
आयोजकों ने कहा कि गंगादास बड़ी शाला आज भी उन 745 साधुओं की जीवित गवाही है और इस प्रकार उनका स्मरण भविष्य की पीढ़ियों तक जीवित रहेगा।