📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / AjayDas
धर्म
गुवाहाटी के पुराने काली पूजा‑समारोह टिन की छत और मिट्टी की मूर्तियों के साथ
✍️ The Assam Tribune
🗓 08 नव. 2026, 03:02 PM
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गुवाहाटी में पुरानी काली पूजा अब भी साधारण जगहों पर टिन की छत, मिट्टी की मूर्तियों और उधार ली गई बेंचों के साथ आयोजित की जा रही है, जो स्थानीय श्रद्धा को दर्शाती है।
असम के गुवाहाटी में पुरानी काली पूजा अब भी ऐसे पड़ोस में आयोजित की जाती है जहाँ साधन सीमित हैं, पर श्रद्धा गहरी है।
इन समारोहों में अक्सर अस्थायी टिन की छतें लगाई जाती हैं, जो दशकों से खर्च‑कम रखने का एक तरीका बन कर चली आ रही हैं।
पूजा में उपयोग की जाने वाली मूर्तियाँ स्थानीय रूप से प्राप्त मिट्टी से बनती हैं, जो पारंपरिक शिल्प को दर्शाती हैं, जबकि भक्तों के बैठने के लिए बेंचें पड़ोसियों या सामुदायिक केंद्रों से उधार ली जाती हैं।
आयोजक और सहभागी कहते हैं कि यह साधारण व्यवस्था सामुदायिक भावना को मजबूत करती है, जिससे परिवार बिना महंगे स्थल के एकत्रित हो सकें।
इन समारोहों में अक्सर अस्थायी टिन की छतें लगाई जाती हैं, जो दशकों से खर्च‑कम रखने का एक तरीका बन कर चली आ रही हैं।
पूजा में उपयोग की जाने वाली मूर्तियाँ स्थानीय रूप से प्राप्त मिट्टी से बनती हैं, जो पारंपरिक शिल्प को दर्शाती हैं, जबकि भक्तों के बैठने के लिए बेंचें पड़ोसियों या सामुदायिक केंद्रों से उधार ली जाती हैं।
आयोजक और सहभागी कहते हैं कि यह साधारण व्यवस्था सामुदायिक भावना को मजबूत करती है, जिससे परिवार बिना महंगे स्थल के एकत्रित हो सकें।