📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rupeshsarkar
बिज़नेस
गुजरात में दशहरा से करोड़ों का व्यापार: वित्तीय सलाहकार का विश्लेषण
✍️ The Economic Times
🗓 21 अक्टू. 2026, 04:36 AM
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एक वित्तीय सलाहकार ने बताया कि गुजरात में दशहरा उत्सव कैसे करोड़ों रुपये के व्यापार में बदलता है और लोगों को गरीबी की सोच छोड़ने की सलाह दी है।
गुजरात के वार्षिक दशहरा उत्सव को एक बड़े व्यावसायिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जैसा कि द इकोनॉमिक टाइम्स में उद्धृत एक वित्तीय सलाहकार ने बताया। उन्होंने कहा कि इस त्यौहार के दौरान व्यापारी, कारीगर और सेवा प्रदाता मिलकर कई करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं, क्योंकि सजावट, मिठाइयाँ, आतिशबाज़ी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर खर्च बढ़ जाता है।
सलाहकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बिक्री वृद्धि केवल मौसमी नहीं, बल्कि स्थानीय उद्यमियों के सोच में बदलाव को दर्शाती है। उत्सव को एक रणनीतिक बिक्री अवधि मानकर व्यवसाय इन्वेंट्री की योजना बनाते हैं, प्रमोशन चलाते हैं और पर्यटन से आय बढ़ाते हैं, जिससे सांस्कृतिक उत्साह को वास्तविक राजस्व में बदला जा रहा है।
उन्होंने लोगों से “गरीबी की सोच” छोड़ने का आग्रह किया और ऐसे त्योहारों को धन सृजन के अवसर के रूप में देखने की सलाह दी। यह टिप्पणी इस तथ्य के साथ मेल खाती है कि गुजरात में प्रमुख त्यौहारों के दौरान रिटेल टर्नओवर राष्ट्रीय औसत से अधिक रहता है।
हालाँकि सटीक आँकड़े नहीं बताए गए, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि दशहरा से जुड़े लेन‑देनों का मूल्य लगातार कई करोड़ रुपये तक पहुँचता है, जिससे राज्य की जीवंत, त्योहारी‑आधारित व्यावसायिक छवि और मजबूत होती है।
सलाहकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बिक्री वृद्धि केवल मौसमी नहीं, बल्कि स्थानीय उद्यमियों के सोच में बदलाव को दर्शाती है। उत्सव को एक रणनीतिक बिक्री अवधि मानकर व्यवसाय इन्वेंट्री की योजना बनाते हैं, प्रमोशन चलाते हैं और पर्यटन से आय बढ़ाते हैं, जिससे सांस्कृतिक उत्साह को वास्तविक राजस्व में बदला जा रहा है।
उन्होंने लोगों से “गरीबी की सोच” छोड़ने का आग्रह किया और ऐसे त्योहारों को धन सृजन के अवसर के रूप में देखने की सलाह दी। यह टिप्पणी इस तथ्य के साथ मेल खाती है कि गुजरात में प्रमुख त्यौहारों के दौरान रिटेल टर्नओवर राष्ट्रीय औसत से अधिक रहता है।
हालाँकि सटीक आँकड़े नहीं बताए गए, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि दशहरा से जुड़े लेन‑देनों का मूल्य लगातार कई करोड़ रुपये तक पहुँचता है, जिससे राज्य की जीवंत, त्योहारी‑आधारित व्यावसायिक छवि और मजबूत होती है।