📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / VasuVR
बिज़नेस
गुजरात जेलों ने व्यापारिक प्रशिक्षण से 44 करोड़ रुपये की वार्षिक टर्नओवर हासिल की
✍️ Bhaskar English
🗓 24 सित. 2026, 09:00 AM
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गुजरात की जेलों ने व्यापारिक प्रशिक्षण के जरिए वार्षिक लगभग 44 करोड़ रुपये की आय की है, जहाँ कैदी कौशल सीखते हुए वेतन कमाते हैं।
गुजरात की जेलों ने ‘व्यवसाय‑उन्मुख’ दृष्टिकोण अपनाते हुए कई कारखानों की स्थापना की है, जहाँ फर्नीचर से लेकर वस्त्र तक के सामान बनते हैं। अधिकारियों के अनुसार इन इकाइयों का संयुक्त वार्षिक टर्नओवर लगभग 44 करोड़ रुपये है।
कैदियों को बढ़ईगीरी, सिलाई, धातु कार्य आदि जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं और वे अपनी मेहनत के बदले दैनिक वेतन प्राप्त करते हैं, जिससे उनका परिवार समर्थन पाता है और रिहाई के बाद पुनः समाज में समायोजन आसान होता है।
जेल प्रबंधन इस मॉडल को पुनरावृत्ति को कम करने और कारावास लागत को घटाने का साधन मानता है। वहीं आलोचक चेतावनी देते हैं कि व्यावसायिक पहल के कारण कैदियों के अधिकारों का हनन या शोषण न हो।
राज्य के जेल प्रशासन विभाग द्वारा शुरू किया गया यह प्रयोग वर्तमान में गुजरात की प्रमुख जेलों में चल रहा है, और यदि आर्थिक‑सामाजिक परिणाम संतोषजनक रहे तो छोटे जेलों में भी इसका विस्तार करने की योजना है।
कैदियों को बढ़ईगीरी, सिलाई, धातु कार्य आदि जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं और वे अपनी मेहनत के बदले दैनिक वेतन प्राप्त करते हैं, जिससे उनका परिवार समर्थन पाता है और रिहाई के बाद पुनः समाज में समायोजन आसान होता है।
जेल प्रबंधन इस मॉडल को पुनरावृत्ति को कम करने और कारावास लागत को घटाने का साधन मानता है। वहीं आलोचक चेतावनी देते हैं कि व्यावसायिक पहल के कारण कैदियों के अधिकारों का हनन या शोषण न हो।
राज्य के जेल प्रशासन विभाग द्वारा शुरू किया गया यह प्रयोग वर्तमान में गुजरात की प्रमुख जेलों में चल रहा है, और यदि आर्थिक‑सामाजिक परिणाम संतोषजनक रहे तो छोटे जेलों में भी इसका विस्तार करने की योजना है।