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26 अग. 2026
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गुजरात हाई कोर्ट ने परिवार द्वारा अलग किए गए गर्भवती महिला को उसके लिव‑इन पार्टनर से मिलवाया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Maulik Kansara
अपराध

गुजरात हाई कोर्ट ने परिवार द्वारा अलग किए गए गर्भवती महिला को उसके लिव‑इन पार्टनर से मिलवाया

✍️ The Times of India 🗓 26 अग. 2026, 02:36 AM 👁 6
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गुजरात हाई कोर्ट ने परिवार द्वारा गर्भवती महिला को उसके लिव‑इन पार्टनर से अलग करने के बाद उन्हें फिर से मिलाने का आदेश दिया।

गुजरात में एक परिवार ने गर्भवती महिला को उसके लिव‑इन पार्टनर से अलग कर दिया, जिससे कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। महिला के वकील ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की, यह तर्क देते हुए कि परिवार का हस्तक्षेप उसकी स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों को खतरे में डाल रहा है।

कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के बाद आदेश दिया कि दोनों को साथ रहने की अनुमति दी जाए, और महिला की गरिमा तथा गर्भावस्था की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। इस आदेश के तहत अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि आगे कोई बाधा न आए, जिससे यह घरेलू साझेदारी विवाद में न्यायपालिका की दुर्लभ हस्तक्षेप को दर्शाता है।

निर्णय में यह भी कहा गया कि गर्भावस्था के कारण महिला को विशेष ध्यान देना आवश्यक है, और अनावश्यक अलगाव से चिकित्सा संबंधी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यद्यपि इस मामले में आपराधिक आरोप नहीं लगे, कोर्ट ने इसे संवैधानिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में माना और परिवार को आगे कोई हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया। इस प्रकार का फैसला समान परिस्थितियों में लिव‑इन पार्टनरों के अधिकारों को सुदृढ़ कर सकता है।
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